कुरुक्षेत्र | हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले को हरियाणा की धर्मनगरी के नाम से जाना जाता है. इसके साथ ही, इस जिले में एक गांव ऐसा भी हैं जिसे फौजियों के गांव के नाम से विख्यात है. यहां हर तीसरे घर से जवान भारतीय सेना में भर्ती होकर देशसेवा में अपना अतुल्य योगदान दे रहा है. वर्तमान में गांव से लगभग 200 जवान भारतीय सेना में भर्ती हैं. कई सैनिक रिटायरमेंट भी आ चुके हैं. वहीं, गांव से 3 जवान देश के लिए अपनी शहादत भी दे चुके हैं.

कुरुक्षेत्र के इस गांव के लिए गर्व की बात
बरना गांव के लोगों ने बताया कि उनके यहां युवाओं में देशभक्ति का जुनून कुटकुट कर भरा हुआ है. हरियाणा से हर 10वां जवान भारतीय सेना में भर्ती हैं लेकिन हमारे गांव से हर तीसरे घर से जवान सेना में भर्ती हैं. ग्रामीणों ने बताया कि ये हमारे गांव के लिए गर्व की बात है कि युवा पीढ़ी बढ़-चढ़कर देशसेवा में अपना योगदान दे रही है.
उन्होंने बताया कि गांव से सुरेंद्र मात्र 18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुआ था और 23 साल की उम्र में उसने देशसेवा में शहादत दी. शहीद सुरेंद्र के पिता नेकी राम ने बताया कि मेरे बेटे की शहादत के बाद गांव को नई पहचान मिली. उसकी शहादत ने गांव के युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया.
अग्निवीर योजना से बदला माहौल
गांव से एक रिटायर्ड फौजी गुरमीत सिंह ने बताया कि अग्निवीर योजना ने युवाओं के मनोबल को कम किया हैं. अब युवाओं में भारतीय सेना में भर्ती होने का पहले जैसा जुनून नहीं रहा. पहले गांव के युवाओं में देशभक्ति का अलग ही जोश था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. युवाओं में सेना के प्रति उत्साह कम हो गया है. अब उनकी नजर विदेश जाने पर टिकी है और इसकी सबसे बड़ी वजह अग्निवीर योजना है.