नई दिल्ली | भारत के जो युवा विदेशों में पढ़ने जाते है उनके लिए एक अच्छी खबर है. अब इन छात्रों को देश में उच्च शिक्षा के बेहतर ऑप्शन उपलब्ध कराने के साथ दुनिया भर के छात्रों के लिए देश को विश्वस्तरीय शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाने की योजना बनाई जा रही है. सोमवार को शिक्षा मंत्रालय द्वारा 50 से ज्यादा देशों के राजनयिकों के साथ इस योजना को साझा किया गया है. इसके साथ ही बताया कि भारत में अब तक 19 टॉप विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की परमिशन मिल चुकी है. ऐसे में छात्रों को पढ़ाई के लिए अपने देश से बाहर नहीं जाना होगा और वह देश में रहते ही बेहतर ऑप्शन प्राप्त कर पाएंगे.

भारत में खुलेंगे कैंपस
इस महीने में अमेरिका, इटली, ब्रिटेन व आस्ट्रेलिया के पांच विश्वविद्यालयों को इसकी अनुमति मिल चुकी है. इनमें ब्रिटेन के तीन बड़े विश्वविद्यालयों को गुजरात के गिफ्ट सिटी में कैंपस खोलने को लेकर आज्ञा मिली है. शिक्षा मंत्रालय की तरफ से आयोजित स्टडी इन इंडिया एजुकेशन डिप्लोमैटिक कान्क्लेव 2026 में शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में बढ़ रहे कदमों के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और उच्च शिक्षा तक सबकी पहुंच करने की तरफ पूरा फोकस किया जा रहा है.
सबसे बड़ा चैलेंज
उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी शक्ति उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, बड़ी युवा आबादी का होना और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ही है. फिलहाल कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत हिस्से में 35 साल से कम उम्र के लोग है. ऐसे में हमारे सामने सबसे बड़ा चैलेंज इन लोगों को पढ़ाई से जोड़ना है और उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में होने वाले पलायन को भी रोकना है.
विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की परमिशन इसी पहल का एक भाग है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में फिलहाल में 12 सौ से ज्यादा विश्वविद्यालय, 45 हजार से ज्यादा कॉलेज व स्वायत उच्च शिक्षण संस्थान है.