नई दिल्ली | केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जनवरी 2025 में आठवें वेतन आयोग का ऐलान किया था. इस ऐलान के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को दो समिति सदस्यों और अध्यक्ष की नियुक्ति का बेसब्री से इंतजार है. उम्मीद है कि सरकार अप्रैल में पैनल के सदस्यों के नामों की घोषणा करेगी. चूंकि, 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है. ऐसे में कर्मचारियों के मन में बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार अगले साल जनवरी महीने से नए वेतन आयोग को लागू कर पाएगी या नहीं.
क्या है पैटर्न?
पिछले उदाहरणों को देखते हुए यह बेहद असंभव दिख रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 से लागू होंगी, क्योंकि पिछले वेतन आयोगों ने अपनी रिपोर्ट को फाइनल रूप देने में आमतौर पर एक साल से ज्यादा का समय लिया था. इस बार, पिछले वेतन आयोगों की तुलना में वेतन आयोग की घोषणा में देरी होने के कारण, संभावना अधिक है कि सिफारिशों का कार्यान्वयन वित्तीय वर्ष 2026- 27 में ही देखा जाएगा.
सरकार ने दी जानकारी
लोकसभा में बीजेपी सांसद कंगना रनौत और तृणमूल कांग्रेस सांसद सजदा अहमद ने केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में संशोधन के लिए आठवें वेतन आयोग गठित करने बारे सवाल खड़ा किया. उनका सवाल यह था कि क्या सरकार ने आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट पेश करने के लिए कोई समय- सीमा निर्धारित की है. इन सांसदों ने वेतन आयोग के लिए संदर्भ शर्तों पर हुई प्रगति के बारे में भी पूछा.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके सवालों के जवाब में कहा कि रिपोर्ट जमा करने की समय- सीमा और संदर्भ की शर्तों पर प्रगति समय आने पर तय की जाएगी. एक अन्य सवाल सातवें वेतन आयोग स्तर पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अनुमानित संख्या के बारे में था, जिन्हें 8वें वेतन आयोग से लाभ मिलने की संभावना है, जिससे ओडिशा समेत पूरे देश में उपभोग को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
इस सवाल के जवाब में निर्मला सीतारमण ने बताया कि केंद्र सरकार के असैन्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों/ पारिवारिक पेंशनभोगियों की अनुमानित संख्या क्रमशः 36.57 लाख (01.03.2005 तक) और 33.91 लाख (31.12.2024 तक) है. उन्होंने बताया कि रक्षाकर्मियों और पेंशनर्स को भी लाभ मिलेगा.
