नई दिल्ली | यूरिया खाद को लेकर एक नई अपडेट सामने आई है. केंद्र सरकार की ओर से पेश इकॉनोमिक सर्वे 2025- 26 में यूरिया की खुदरा कीमत में मामूली बढ़ोतरी करने की बात कही गई है. वर्तमान में किसानों को 45 किलोग्राम प्रति यूरिया बैग के लिए 242 रुपए देने पड़ रहे हैं. इस सर्वे में यह भी कहा गया है कि यूरिया की कीमत में बढ़ोतरी के साथ इसपर मिलने वाली सब्सिडी के नियमों में भी बदलाव किया जाएगा.
इसकी प्रमुख वजह सब्सिडी वाले यूरिया खाद के माध्यम से अत्यधिक नाईट्रोजन का इस्तेमाल करना है. कृषि संबंधी मानक अधिकांश फसलों और मिट्टी के प्रकारों के लिए 4:2:1 का सुझाव देते हैं.
ज्यादा यूरिया के हानिकारक दुष्प्रभाव
आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि यूरिया खाद का अंधाधुंध इस्तेमाल मिट्टी के कार्बनिक पदार्थों को कम कर रहा है. सूक्ष्म पोषक तत्वों को तेजी से घटा रहा है और मिट्टी की संरचना को कमजोर बना रहा है. भूजल में नाइट्रेट रिसाव को बढ़ाता है जिसके चलते कई सिंचित क्षेत्रों में उर्वरक के प्रति उपज की प्रतिक्रिया स्थिर हो गई है या घट गई है.
इसमें आगे कहा गया है कि भारत का डिजिटल कृषि बुनियादी ढांचा और आधार सम्बद्ध उर्वरक बिक्री, एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी और पीएम-किसान मंच जैसे सुधार को परिचालन के स्तर पर संभव बनाता है. इसका मुख्य उद्देश्य उर्वरक के उपयोग को कम करना नहीं है, बल्कि इसे फसल की वस्तुस्थिति और मिट्टी की जरूरत के साथ फिर से तालमेल बिठाना है.
किसानों के खातों में आएगी सब्सिडी राशि
वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा यूरिया खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी की राशि सीधे उत्पादन करने वाली कंपनियों को मिल रही है. कंपनियां यूरिया के उत्पादन की लागत का 50% ही किसानों से वसूल करती है जबकि शेष राशि उन्हें पहले ही सब्सिडी के रूप में सरकार से मिल जाती है.
अब इस नियम में बदलाव पर विचार किया जा रहा है. इसके तहत, किसान यूरिया खाद को बाजार मूल्य पर खरीदेंगे और इसकी आधी राशि सरकार सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करेगी जैसे PM किसान योजना में की जा रही है.
