नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों से ट्रैफिक जाम की जकड़न दूर करने की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत होने जा रही है. ट्रैफिक पुलिस ने बताया है कि इसके लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस कैमरों का सहारा लिया जाएगा जो वास्तविक समय में ट्रैफिक के दबाव को भांपकर सिग्नल को ऑटोमैटिक कंट्रोल करेंगे. इस योजना को इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) में शामिल किया गया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.

नए सिस्टम से मिलेगा फायदा
वर्तमान में सड़कों पर जो कैमरे लगे हुए हैं, वो केवल ट्रैफिक नियम तोड़ने वालो पर नजर रखने और उनका चालान काटने में इस्तेमाल हो रहे हैं. ट्रैफिक सिग्नल के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं है. मौजूदा समय में चौक- चौराहों पर पारंपरिक फिक्स्ड टाइमर सिग्नल लगे हुए हैं और इनमे मैनुअल फीडिंग से सिग्नल का समय निर्धारित किया हुआ है.
दिल्ली की सड़कों पर यहीं ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह है क्योंकि समय निर्धारण ट्रैफिक घनत्व के अनुसार देर तक लालबत्ती रहने से वाहनों की लंबी कतार लग जाती है, जो ट्रैफिक जाम को बढ़ावा देती है. ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि अब नई योजना में एडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (ATCS) के तहत फिक्स्ड सिग्नल टाइमर के बजाय, वास्तविक समय में ट्रैफिक घनत्व के आधार पर सिग्नल का समय ऑटोमैटिक तय होगा.
इस तरह काम करेगा नया सिस्टम
चौक-चौराहों पर सिग्नल के रोटेशन में किसी साइड 1 मिनट का टाइमर लगा हैं लेकिन उस साइड की गाड़ियां 30 सेकंड में निकल जाती है तो ऑटोमैटिक 31वें सेकेंड पर अपने आप उस साइड की बत्ती लाल हो जाएगी. ATCS फिर दूसरी साइड ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बत्ती को हरा करेगा जहां लंबी कतार लग रही है. ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इस नई व्यवस्था से लगभग 40% तक ट्रैफिक जाम को कम करने में मदद मिलेगी. इस योजना में पुराने कैमरों के स्थान पर नए थर्मल कैमरों को लगाया जाएगा, जो कोहरे में भी मददगार साबित होंगे.
ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि ATCS को 1 हजार से ज्यादा जंक्शन पर लगे सिग्नलों पर लगाया जाएगा. इस प्रोजेक्ट को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा और आने वाले 4 साल के भीतर इस नए प्रयोग को पूरी दिल्ली में क्रियान्वयन कर दिया जाएगा.