चंडीगढ़ | प्रदेश में कृषि विधेयक के विरोध में हरियाणा में किसानों का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप लेता जा रहा है. किसानों ने रोष जताते हुए राज्य के प्रमुख हाइवे को जाम कर दिया है. वहीं कुछ लोग तो डिप्टी सीएम को इस्तीफा व भाजपा का दामन छोड़ने की बात कर रहे हैं. साथ ही, किसानों को लगता है कि सरकार उनकी फसलों का एमएसपी नही देना चाहती जिसे लेकर उनमें और अधिक रोष है. इसके बारे में संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बताया कि केंद्र सरकार के कृषि संबंधित इस नए अध्यादेश में फसलों के एमएसपी को खत्म करने का जिक्र नही है. किसानों की फसल अनाज मंडियों में बिना किसी रूकावट के तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही खरीदी जाएंगी और अधिक कीमत मिलने पर किसान अन्य मार्केटों में भी अपना अनाज बेच सकते हैं. चौटाला ने कहा कि यदि किसानों के हितों पर यदि कोई आंच आती है तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. परन्तु किसानों को एमएसपी को लेकर किसी भी अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नही है, यह व्यवस्था सरकार द्वारा कभी खत्म नही होगी.
पूर्व मुख्यमंत्री हूड्डा पर कसा तंज
इस बारे में बात करते हुए डिप्टी सीएम ने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने राजनीतिक लाभों की पूर्ति के लिए किसानों को गुमराह कर रहे हैं. साथ ही, उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश का विरोध करने वाले हुड्डा ने सीएम रहते हुए ओपन मार्केट की वकालत की थी तथा केंद्र की तात्कालिक मनमोहन सरकार द्वारा गठित समिति के चेयरमैन के तौर पर इन सिफारिशों पर हस्ताक्षर भी किए थे. हुड्डा से पूछा कि वे किसानों को जवाब दें कि उनके इस दोहरे रवैये को अपनाने के पीछे क्या मजबूरी है व कांग्रेस पार्टी प्रदेश के किसानों को गुमराह क्यों कर रही है. उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में भी पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग का जिक्र था, लेकिन कांग्रेसी आज इसी व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं जबकि यह किसानों के लिए हितकारी साबित होने वाली है.
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बताया कि अगले महीने से किसानों की खरीफ फसलों को एमएसपी पर खरीदा जाएगा जिसमे मक्का भी शामिल है, इसलिए किसान निश्चिंत रहें. डिप्टी सीएम ने कहा कि उनके लिए किसानों के हित ही सर्वोपरी हैं, इसलिए किसानों को लेकर उनकी नीयत में ना कभी कोई खोट आया है और ना ही आगे कभी आएगा.
