हरियाणा में नियंत्रित क्षेत्र के बाहर बनी अपनी ही भूमि नही बेच पाएंगे लाखों लोग

चंडीगढ़ | प्लॉटों व अन्य अचल सम्पतियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में हो रही धांधलियों पर अंकुश लगाने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा जमीन पंजीकरण प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिये नए नियम बनाये गए हैं जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लग सके. साथ ही, बीते दिनो हरियाणा सरकार ने प्रदेश के 242 गांवों को महात्मा गांधी के जन्मदिवस के अवसर पर लाल डोरामुक्त करने का निर्णय लिया था. जिससे मकानों, प्लाटों की रजिस्ट्री हो सके ताकि इनकी मलकियत सम्बन्धी समस्याओं से निजात मिल सके.

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नियंत्रित इलाके के बाहर नही बेच पाएंगे भूमि

वैसे तो सरकार द्वारा लालडोरा जैसी व्यवस्था खत्म करने की पहल अच्छी है परन्तु लालडोरा के बाहर बने मकानों की रजिस्ट्री प्रक्रिया का अधिकार छीने जाने से आम जनमानस की मुसीबतें बढेंगी. साथ ही, यह कदम बिल्डरों पर मेहरबानी करने वाला भी माना जा रहा है क्योंकि नए नियमों के तहत राज्य के लगभग 15 लाख लोग नियंत्रित क्षेत्र के गांवों में लालडोरा से बाहर बने अपने घर-दुकानें नहीं बेच पाएंगे. पुराने नियमों के अनुसार जिन्होंने बिना एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) एक हजार वर्ग गज या अधिक कृषि भूमि खरीदी थी, उसकी खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध नहीं रहेगा. कृषि भूमि के मामले में यदि किसी का हिस्सा इससे कम है तो उसक़ी भी रजिस्ट्री बाधारहित होगी, परन्तु लालडोरा के बाहर हुए अन्य निर्माण के लिए न डीटीपी से एनओसी मिलेगी और न ही तहसील से सीधी रजिस्ट्री हो सकेगी.

चूंकि इनमें अधिकतर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने पिछले कुछ दशकों के दौरान प्रापर्टी डीलरों व भूमाफिया के बातों में आकर यह अनधिकृत जमीन खरीदी थी. वैसे तो नियंत्रित क्षेत्र का शायद ही एक गांव भी ऐसा न मिले जहां लालडोरा से बाहर कृषि भूमि में मकान नहीं बने हैं. यद्दपि शहर से सटे कुछ गांवों में तो अन्य राज्यों के लोगों ने भी मकान बनाए हुए हैं. अब चूंकि नए नियमों के बाद यदि उत्तर प्रदेश का कोई व्यक्ति अपना घर बेचकर जाना चाहे तो ऐसा संभव नहीं रहा. हरियाणा प्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद शहरों में सैकड़ों अनधिकृत काॅॅलोनियां नियमित हुई, मगर गांवों में लालडोरा के बाहर बना एक भी घर नियमित नहीं हो पाया.

अधिकांश गांवों में लालडोरा के बाहर की कालोनियों में सरकारी खर्च पर शानदार सड़कें हैं, मगर सिस्टम सॉफ्टवेयर रजिस्ट्री की अनुमति नहीं दे रहा. नगर आयोजना व राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इन सभी खामियों को स्वीकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रेवाड़ी दौरे पर आए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने सात दिन में इन समस्याओं के समाधान का वादा किया था, मगर अभी यह समस्याएं वैसी ही बनी हुई हैं जिसे जल्द निजात दिलाने के आश्वासन सरकार द्वारा दिये जा रहे हैं.

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