रेवाड़ी | हरियाणा का वह जिला, जहां पीतल की चमक दूर-दूर तक पहचान बना चुकी है, उसका नाम है रेवाड़ी. यह शहर अपने पारंपरिक पीतल उद्योग और हस्तशिल्प के लिए देशभर में मशहूर है. यहां बनने वाले पीतल के बर्तन, सजावटी सामान और धार्मिक वस्तुएं ऐसी चमक लिए होती है कि लोग अक्सर उन्हें ‘सोने जैसी दमक’ वाला बताते है.

दशकों पुरानी विरासत
रेवाड़ी का पीतल उद्योग कोई नया नहीं, बल्कि दशकों पुरानी विरासत है. पुराने समय में यहां के कारीगर हाथ से पीतल के बर्तन तैयार करते थे. धीरे- धीरे यह काम एक बड़े उद्योग में बदल गया. आज भी शहर के कई परिवार पीढ़ियों से इसी कला को आगे बढ़ा रहे है. खास बात यह है कि यहां तैयार किए गए पीतल के उत्पाद सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश तक भेजे जाते है.
खास है रेवाड़ी का पीतल
रेवाड़ी में तैयार होने वाले पीतल के सामान की सबसे बड़ी पहचान उसकी फिनिशिंग और चमक है. इतिहासकारों के अनुसार पुराने समय मे रेवाड़ी में पीतल के हथियार और तोपें बनाई जाती थी. ऐसा माना जाता है कि पानीपत की पहली लड़ाई में यहां बनी पीपल की तोपों का इस्तेमाल किया गया था. रेवाड़ी में पीतल उद्योग शुरू करने का श्रेय सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य को दिया है.
रोजगार का बड़ा साधन
रेवाड़ी का पीतल उद्योग हजारों लोगों को रोजगार दिया है. शहर में छोटी- बड़ी कई यूनिट्स है, जहां कारीगर डिजाइनिंग, ढलाई, कटिंग और पॉलिशिंग का काम करते है. यह उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. पीतल उद्योग से जुड़े कारोबारी बताते है कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस काम में लगा हुआ है. उनके दादा और पिता भी पीतल के बर्तन बनाते थे और अब वह खुद पिछले 30 साल से इस कारोबार को संभाल रहे है. रेवाड़ी ने अपने पीतल उद्योग के दम पर एक अलग पहचान बनाई है. यही कारण है कि यहां के पारंपरिक पीतल उत्पाद आज भी लोगों की पहली पसंद बने हुए है.