रोहतक | इसे कहते हैं पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करना. पहरावर स्तिथ नगर निगम की गौशाला के बाहर करीब 100 साल पुराने बरगद को बचाने की कवायद शुरू की गई है. बता दे कि 5 साल पहले बरगद का पेड़ पूरी तरह से ठुठ बन गया था. वही गोवंश ने इसकी छाल को खा लिया था जिसकी वजह से पत्ते भी नहीं आते थे. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि कहीं कोई हादसा न हो जाए इस वजह से इस पेड़ को कटवा दें.
दोबारा से हरा भरा हुआ 100 साल पुराना बरगद का पेड़
वहीं समाजसेवी राजेश टीनू लूंबा ने पेड़ कटवाने से इनकार कर दिया, पिछले साल उन्होंने पेड़ बचाने की कवायद शुरू कर दी. अब उसमें और भी सुधार किए गए तो परिणाम सुखद सामने आने लगे. अब ठूठ बन पेड़ मे पत्तियां आने लगी.
वहीं समाजसेवी लूंबा ने बताया कि वह करीब 5 साल पहले गौशाला का संचालन करने के लिए यहां आया. तब उन्होंने इस पेड़ को देखा. पिछले साल जब इस पेड़ को बचाने के लिए आखिरी प्रयास का विचार मन में आया, लोगों की राय के बाद सबसे पहले पेड़ की जितनी छाल को गोवंश खा चुके थे, वहां देसी गाय के गोबर का लेप लगाया गया. इस साल बरसाती सीजन का इंतजार किया गया.
गोबर के पानी के मिश्रण का घोल देते रहे. वहीं पेड़ के चारों तरफ बाउंड्री करवा दी गई. जिससे गोवंश पेड़ को नुकसान ना पहुंचा सके. पेड़ की जड़ को चार चार फीट मिट्टी से ढक दिया गया. जिससे की जड़ और भी मजबूत हो और छाल वाला हिस्सा कम हो. वही सबसे नीचे तल पर दो-दो फीट जल घर से निकाली गई मिट्टी डलवाई गई. बालू और सबसे ऊपर मिट्टी आधा-आधा फीट डलवा दी गई.
