रोहतक | हरियाणा के रोहतक जिले के पहरावर गांव स्थित नगर निगम की गौशाला में गांव के गोबर से दीये, लकड़ी के ब्लॉक और वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जा रहे हैं. इस काम के लिए विशेष मशीनों की मदद ली जा रही है. यहां रोजाना निकलने वाले हजारों किलो गोबर का इस्तेमाल करके रोजगार का जरिया बनाया जा रहा है. हर रोज लगभग 12000 किलोग्राम गोबर प्राप्त हो रहा है. इससे पहले काफी ज्यादा समस्या सामने आ रही थी, लेकिन गोबर का इस्तेमाल करके उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इससे महिलाओं को रोजगार का नया स्रोत भी मिल रहा है.
रोजगार के खुले रास्ते
इस बारे में जानकारी देते हुए नगर निगम कमिश्नर डॉक्टर आनंद कुमार ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य गोबर का सही निस्तारण करके गौशाला को आत्मनिर्भर बनाना है. इससे लोगों को रोजगार मिल रहा है और आमदनी भी हो रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गौशाला को मॉडल प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित किया जाएगा. इस काम में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सहायता ली जाएगी.
दान में मिली थी मशीन
इस गौशाला में अभी तक गोबर से केवल खाद और वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा था, लेकिन अब यहां गोबर के दीये और गोकाष्ट भी बनाए जा रहे हैं. दिए बनाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो कि गौशाला को दान के रूप में मिली है. निगम द्वारा जानकारी दी गई कि आने वाले सीजन में इन्हें बाजार में बेचने के लिए उतारा जाएगा. लकड़ी के ब्लॉक घरेलू औद्योगिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे.
