हरियाणा में 9 गांवों के किसानों ने सरकार से मांगी इच्छा मृत्यु, जानिए क्या है मामला…

सिरसा । भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा न मिलने से परेशान सिरसा जिले के किसानों ने इच्छा मृत्यु की मांग की है. बता दें कि भारतमाला नेशनल हाईवे जोकि पंजाब के अमृतसर से वाया हरियाणा, राजस्थान होते हुए गुजरात जाएगा, उसके अंतर्गत डबवाली हल्के के नौ गांवों की जमीन राज्य व केन्द्र सरकार अधिग्रहण कर रही है. किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार कौड़ियों के भाव में जमीन खरीद रही है. किसान पिछले तीन साल से मार्केट रेट से चार गुणा मुआवजा, खेतों में बने मकानों का मुआवजा और सड़क के दोनों ओर साइड लिंक रोड़ के उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. इसी संबंध में शनिवार को किसानों ने डबवाली हल्के के गांव शेरगढ़ में नेशनल हाईवे का काम रुकवा दिया है.

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किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य व केन्द्र सरकार किसानों की जायज मांगों को पूरा करने की बजाय NHAI को जबरन खेतों में घुसाने का काम कर रही है. किसानों का कहना था कि हमने पहले भी विरोध करते हुए डबवाली के गांव चौटाला व अलीका में दो बार काम रुकवाया है . वहीं शनिवार को गांव शेरगढ़ में NHAI के कर्मचारियों और ठेकेदार की जबरन खेतों में घुसने की सूचना जैसे ही किसानों को मिली , हजारों की संख्या में इक्कठा हुए 9 गांवों के किसानों ने NHAI अमले को वापस लौटा दिया.

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इच्छा मृत्यु की मांग

इसके बाद किसानों ने उपखंड कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक किसानों की जायज मांगों को सरकार पूरा नहीं करेंगी,किसी भी हालत में हाइवे निर्माण का कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा. ज्ञापन में किसानों ने कहा कि यदि सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करना चाहती है तो हम 9 गांवों के किसान इच्छा मृत्यु की मांग करते हैं.

किसान नेता राकेश फगाड़ियां ने कहा कि यदि सरकार द्वारा हमारी मांगों को नहीं माना गया तो NHAI के बुलडोजर किसानों की जमीन पर नहीं बल्कि किसानों की छाती पर चलेंगे. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल इन 9 गांवों के किसानों का नही है बल्कि सिरसा जिला व पड़ोसी राज्य राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के तमाम किसान साथियों को लामबंद कर उग्र आंदोलन करेंगे. अगर सरकार किसानों पर किसी भी प्रकार की ज्यादती करतीं हैं तो युद्ध स्तर पर आंदोलन होगा और शासन प्रशासन अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें. जायज मांगों को लेकर अंतिम सांस तक संघर्ष किया जाएगा.

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