हरियाणा की गोल्डन नदी बनी लोगों की रोजी- रोटी का जुगाड़, काम में महारत वालों की लाखों में कमाई

यमुनानगर | हरियाणा का एक ऐसा जिला जहां की नदी में रेत और पानी नहीं, बल्कि सोना भी बहता है. हम बात कर रहे है यमुनानगर की बोली नदी की, जहां हिमाचल के पहाड़ों से बारिश की हर बूंद मिट्टी कुरेदती हुई नीचे पहुंचते- पहुंचते उसमें सोने के छोटे कण मिल जाते है. इसी को छानकर लोग सोना निकालते है. कभी- कभी तो यहां 1 से 2 ग्राम सोना निकालता है. आइए विस्तार से जाने…

Yamunanagar Gold River

हरियाणा की गोल्डन नदी

हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बार्डर पर यमुनानगर जिला बसा हुआ है. इस जिले में एक नदी बहती है, जिसका नाम है बोली नदी. इसी नदी में पानी और रेत के साथ सोना बहता है और यहां के लोग इसी से अपनी रोजी- रोटी चलाते है. यमुनानगर के मानकपुर गांव में के सोना निकालने वालों से मिली जानकारी में उन्होंने बताया कि हमें सोना निकालते हुए 35 साल हो गए है. हम बचपन से देखते आ रहे है हमारे पिता जी और दादाजी यही काम किया करते थे. हम जब छोटे थे तब से पिताजी के साथ आते थे. धीरे-धीरे हमने इस काम को सीखा और आज हम भी यह कार्य करते है.

हमारी यह चौथी या पांचवी पीढ़ी है जो सोना निकालने का काम करती है. यहां बारिश के दिनों में पहाड़ों से मिट्टी कट-कट कर पानी के जरिए बोली नदी में आती है और इसमें ही प्राकृतिक स्रोत से सोने के कण भी पानी के साथ रेत के कणों में मिलकर बह आते है जिससे हमारे सैकड़ों परिवारों का पालन- पोषण होता है.

नदी से सोना निकालने की प्रक्रिया

मिली जानकारी में उन्होंने बताया कि जब इस नदी में काम कम होता है तो वह गंगा, सतलुज जैसी बड़ी नदियों से सोना निकालने के लिए जाते है. वहां वह 2- 2 महीने तक काम पर रहते है. इसके अलावा, उन्होंने बताया कि नदी से सोना निकालने के लिए विशेष औजार होते हैं. बारिश के दौरान जब नदियों में पानी कम होता है, तब पानी के साथ रेत और बजरी बहकर आती है. ये रेत और बजरी किनारों पर जम जाती है. हम किनारों से मिट्टी खोदकर उसको पानी में एक लकड़ी के औजार पर साफ करके देखते है, अगर इनमें कोई सोने का कण मिलता है तो आगे सोना निकालने की प्रक्रिया शुरू करते है.

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बारिश के दिनों में निकलता है टेंडर

बारिश के दिनों में यमुनानगर प्रशासन द्वारा सोना निकलने के लिए टेंडर निकाला जाता है. इसमें ठेकेदार उस टेंडर को लेते है फिर आगे कारीगरों को काम पर रखा जाता है. पिछले बारिश के सीजन में एक कश्ती पर लगभग 20 हजार रूपए सीजन के लिए गए थे, जिनमें 3 से 4 लोग काम करते है.

एक मजदूर की मजदूरी 2 हजार के करीब होती है. यह काम बहुत जोखिम भरा होता है, क्योंकि कभी- कभी जब एक साथ नदी में ज्यादा पानी आ जाता है तो कारीगर उसके साथ बह जाते है. हर समय जान हथेली पर रखकर कार्य करना पड़ता है.

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Anita Poonia
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मेरा नाम अनीता पूनिया है. मैं पिछले 2 साल से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हूँ. वर्तमान मे Haryana E Khabar न्यूज वेबसाइट के लिए कंटेंट राइटर का काम कर रही हूँ.