नई दिल्ली | गंजेपन और समय से पहले चेहरे पर झुर्रियां आने से परेशान दिख रहे लोगों के लिए मेडिकल साइंस की दुनिया से एक अच्छी खबर सामने आई है. इन समस्याओं से जूझ रहे लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इनका समाधान आपके अपने खून में छिपा है. आपके खून की बूंद से नए बाल उगाने के साथ ही झुर्रियों को भी दूर किया जा सकता है. महज 20 ML खून से निकाला गया प्लेटलेट्स गंजापन दूर करने के साथ चेहरे की खूबसूरती भी बढ़ा सकता है.
इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. देबाशीष गुप्ता ने बताया कि प्लेटलेट्स में विकास की क्षमता होती है. इसी कारण से इसका उपयोग कर गठिया और स्पॉडिलाइटिस के मरीजों को राहत देने में सफलता हासिल हुई है. इसी कड़ी में अब गंजेपन के साथ ही कॉस्मेटिक के क्षेत्र में भी इस पर शोध किया गया है.
उन्होंने बताया कि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और अब स्कीन रोग विशेषज्ञों की देखरेख में जरूरतमंद लोगों को लाभ प्रदान किया जा रहा है. विदेशों में इसका बहुत ज्यादा उपयोग हो रहा है तो वहीं देश के कुछ केंद्रों पर भी इसकी शुरुआत की गई है.
संक्रमण से होगा बचाव
डॉ. देबाशीष ने बताया कि अपने खून से निकाले गए प्लेटलेट्स से गंजेपन और झुर्रियों का इलाज कराने पर संक्रमण का खतरा पूरी तरह से टल जाएगा. उन्होंने बताया कि दूसरे व्यक्ति से लिए गए खून से संक्रमण का खतरा बना रहता है. इस दृष्टि से भी यह तकनीक बेहद ही कारगर है.
इस तकनीक में प्लेटलेट्स को गंजेपन वाले क्षेत्र में इंजेक्शन के जरिए अंदर डालते हैं. वे उस एरिया में जाकर बंद ग्रोथ फैक्टर को दोबारा खोल देते हैं, जिससे बाल के फॉलिकल फिर से बाहर निकलने लगते हैं. फॉलिकल बालों को विकसित करने का काम करते हैं. इसके साथ ही बालों को पकड़कर रखते हैं. इससे बालों का झड़ना रुकता है. हेयर फॉलिकल के ऊपर एक खुला छेद होता है, यहीं से बाल त्वचा से बाहर निकलते हैं और फिर धीरे-धीरे ग्रोथ करते हैं.
बूटॉक्स से भी बेहतर परिणाम
डॉ. देबाशीष ने बताया कि बालों के फॉलिकल को खोलने वाला प्लेटलेट्स कोलेजन्स को भी सक्रिय कर देता है. कोलेजन त्वचा की इलास्टिसिटी और हाइड्रेशन को मेंटेन करता है. जब शरीर में कोलेजन का उत्पादन कम होना शुरू हो जाता है इसकी वजह से चेहरे पर महीन रेखाएं, झुर्रियां पड़ने लगती हैं. कॉस्मेटिक के क्षेत्र में प्लेटलेट्स थेरेपी का बूटॉक्स से भी बेहतर परिणाम सामने आ रहा है. उन्होंने बताया कि दोनों ही स्थिति में तीन से चार स्टेप के बाद परिणाम सामने आने लगता है.
