नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनावों (Delhi Assembly Election) के शेड्यूल की घोषणा हो चुकी है. तमाम पार्टियों ने चुनावों के लिए कमर कस ली है. इन चुनावों में वोटों का मामूली अंतर और बढ़े हुए मतदाता राजनीतिक दलों की रणनीति को चुनौती देते नज़र आ सकते हैं. 2020 के चुनावी आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 7 सीटों पर हार- जीत का फैसला 5,000 और 15 सीटों पर 10,000 से भी कम था. 2020 की अपेक्षा अबकी बार हर विधानसभा क्षेत्र में औसतन 11,000 से ज़्यादा नए मतदाता जुड़े हैं.
इन सीटों पर हो सकता है कड़ा मुकाबला
राजधानी में कुल मतदाताओं की संख्या 1.47 करोड़ से बढ़कर अब 1.55 करोड़ हो गई है. ये आठ लाख नए मतदाता चुनावी रुख को बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में कम अंतर से हार- जीत वाली सीटों पर इन नए मतदाताओं का रुझान नतीजों का रुख बदल सकता है. सभी राजनीतिक दलों के लिए इन वोटरों को अपने पक्ष में करना बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. विशेषतौर पर उन सीटों पर जहाँ पिछले चुनावों में हार- जीत का अंतर काफी कम रहा था.
यह होगी आगामी चुनावी प्रक्रिया
राजधानी की सभी 70 विधानसभा सीटों पर 5 फरवरी को मतदान होगा और 8 फरवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त होगा, इसलिए नई सरकार के गठन के लिए चुनावी प्रक्रिया को समय पर पूरा किया जाएगा. 2020 के चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह हाशिए पर चली गई थी, उसे कुल वोटों का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा मिला था. इस वजह से मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और आप के बीच सिमट गया था. इस बार अगर कांग्रेस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में सफल होती है, तो चुनावी जंग और भी रोमांचक हो सकती है.
