नई दिल्ली | विकट परिस्थितियों का बहाना बनाकर पीछे हटने वालों को मंजिल नसीब नहीं होती है. सफलता उन्हीं के कदम चूमती है, जो मुश्किल हालातों से लड़ते हुए हर कदम पर संघर्ष करते हैं. इस पंक्ति को दिल्ली (Delhi) की रहने वाली पूनम ने सच साबित कर दिखाया है, जो किसी के आगे हाथ फ़ैलाने की बजाय पढ़ाई के साथ- साथ नौकरी करते हुए अपनी आजीविका चला रही है. पूनम अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान की जिंदगी जी रही है.
दिव्यांग लोगों को देती है रोजगार
मिट्टी कैफे नाम की एक संस्था है, जो दिव्यांग लोगों को रोजगार देने का काम करती है. इसी जगह पर पैर से दिव्यांग 20 वर्षीय पूनम नौकरी करती है. उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के साथ- साथ इस कैफे में कैशियर की नौकरी की. पूनम ने बताया कि मिट्टी कैफे स्पेशल दिव्यांग लोगों के लिए हैं. यहां किसी से जबरदस्ती काम नहीं करवाया जाता है.
मिट्टी कैफे में एक साल से ज्यादा समय से काम कर रहे बिहार के विराज ने बताया कि उनका एक हाथ कट चुका है और आंखों से भी ठीक- ठाक ही दिखाई देता है. इसके बावजूद, वह अपनी मेहनत के दम पर 12 हजार रूपए महीना कमाते हुए अपनी आजीविका चला रहे हैं. उन्होंने दिव्यांग लोगों को संदेश देते हुए कहा कि सड़कों पर भीख मांगने की बजाय वो मेहनत करके अपना पेट पाल सकते हैं. हालात चाहे कितने भी बुरे क्यों न हो, इंसान को हमेशा संघर्ष को तवज्जो देनी चाहिए.
मेहनत से मिलती है कामयाबी
मास्टर की डिग्री हासिल कर मिट्टी कैफे में मैनेजर की नौकरी करने वाली एक अन्य दिव्यांग लड़की ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि वह समाज से अलग हैं, पर जब से उन्होंने नौकरी करना शुरू किया हैं, अपने आप पर बहुत खुशी हो रही है. परिजनों का भी उन्हें भरपूर सहयोग रहता है. वहीं, इसी कैफे में नौकरी करना वाले एक दिव्यांग युवा ने कहा कि वह ऐसी हालत में भी मेहनत करके अपने पैरों पर खड़े हैं और इसकी उन्हें बहुत खुशी है.
किसने की मिट्टी कैफे की शुरुआत?
मिट्टी कैफे का संचालन एक एनजीओ करता है. जिसकी सीईओ- संस्थापक अलीना आलम हैं, जिन्होंने 2017 में दिव्यांग लोगों के लिए मिट्टी कैफे शुरू किया था, जहां आज पेन इंडिया 50 से ज्यादा कैफे खुल चुके हैं और पूरे दिल्ली– NCR में 5 कैफे मौजूद है.
