चंडीगढ़ | सड़क हादसों में घायलों को गोल्डन ऑवर (वो समय जिसमें जान बचाना संभव होता है) में उपचार और हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए हरियाणा सरकार (Haryana Govt) ने एक बड़ा कदम उठाया है. सूबे की नायब सैनी सरकार ने राज्य से गुजरने वाले नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे के आसपास ट्रामा सेंटर बनाने की योजना बनाई है.
14 जिलों में खुलेंगे ट्रामा सेंटर
पिछले साल चंडीगढ़ में हुई स्वास्थ्य विभाग की बैठक में राज्य सरकार ने फैसला लिया हैं कि जिन जिलों से नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे गुजरते हैं, उन सभी जिलों के अस्पतालों में ट्रामा सेंटर स्थापित किए जाएंगे. पहले चरण में नारनौल, महेन्द्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, जींद, पानीपत और सोनीपत समेत 14 जिलों में ट्रामा सेंटर बनाने की योजना बनाई गई है.
इन ट्रामा सेंटर में आधुनिक उपकरण और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे मरीज की जिंदगी बचाने की ज्यादा से ज्यादा संभावना रहें. स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में उपचार के लिए जरूरी उपकरण खरीद, मरम्मत लैब के उपकरण और ब्लड बैंक में जरूरी सामान खरीदने के लिए 26.30 करोड़ रूपए की बजट राशि जारी की है.
इसके लिए उपरोक्त सभी जिलों को 30 मार्च तक उपकरण खरीदने और इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि जब तक नेशनल हाईवे या दूसरी जरूरत की जगह पर ट्रामा सेंटर नहीं बनता है, तब तक ये उपकरण सिविल अस्पताल में ही रहेंगे.
समय पर इलाज के अभाव में चली जाती है जान
हाईवे पर होने वाले हादसों में समय पर इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण अक्सर लोगों की जान चली जाती है. हाईवे पर दुर्घटना होने के बाद घायल को पहले जिला अस्पताल में दाखिल करवाया जाता है. गंभीर हालत होने पर उन्हें पीजीआई रेफर किया जाता है. इस दौरान कभी अधिक खून बहने तो कभी सिर में या शरीर के अंदर खून फैलने, जम जाने के कारण मरीज को जिंदगी से हाथ धोना पड़ता है.
इसलिए जरूरी है ट्रामा सेंटर
हरियाणा में NH- 152D, दिल्ली- कटरा एक्सप्रेसवे जैसे हाइवे शहरों से दूर खेतों से होकर गुजर रहे हैं. ऐसे में हाइवे पर एक्सीडेंट होने की स्थिति में शहर के अस्पताल तक मरीज को लाने में एक घंटे तक का समय लग जाता है. कई बार इस समयावधि में मरीज की मौत भी हो जाती है. ऐसे में यदि हाइवे के आसपास ट्रामा सेंटर की सुविधा होगी तो 10 मिनट के भीतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी जिससे मरीज की जान बचाने की संभावना बहुत ज्यादा रहेगी.
