सिरसा | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर ऑर्गेनिक और बागवानी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकें. इसी कड़ी में सिरसा जिले के गांव गांव कलुवाना निवासी एक किसान सौंफ की खेती से अच्छा- खासा मुनाफा कमा रहा है.
मालामाल हुआ किसान
आधुनिकता के इस युग में आज किसान परम्परागत खेती की बजाय अधिक मुनाफा देने वाली नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं. ऐसी ही एक लाभदायक सौंफ की फसल हैं, जिसकी सुंगध औषधीय गुण और बहुआयामी उपयोगिता के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है. सिरसा के गांव कालुआना के किसान अमन गोदारा ने भी अब देसी सौंफ की खेती में अपनी किस्मत आजमाई है.
किसान अमन ने बताया कि सौंफ की खेती से प्रति एकड़ लगभग 1 लाख रुपए तक की बचत हो जाती है. उन्होंने बताया कि यह फसल कम पानी में भी बंपर उत्पादन देती है. इसकी खेती में अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती. साथ ही, प्राकृतिक और जैविक दोनों तरीके से सौंफ को उगाया जा सकता है.
सौंफ की खेती का उपयुक्त समय
अमन गोदारा ने बताया कि सौंफ की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु, मिट्टी और समय का ध्यान रखना जरुरी है. सौंफ की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में की जाती है. यह फसल 180 दिनों में पूरी तरह से पककर तैयार हो जाती है. इसके साथ ही, उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि किसानों की आय दोगुना करने के लिए सौंफ जैसी खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और इसे भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया जाए.
