झज्जर | आज के समय में परिवार केवल माता- पिता और दो बच्चों तक सीमित होते जा रहे हैं. मेट्रोपॉलिटन शहरों में स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ती जा रही है. लिव- इन रिलेशन जैसी परंपराएं धीरे- धीरे समाज में पैर पसार रही हैं. ऐसे समय में कुछ परिवार आज भी हमारी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखे हुए हैं. हरियाणा के झज्जर जिले (Jhajjar District) में ऐसा ही एक परिवार देखने को मिला है, जो बीते 60 वर्षों से एकता की मिसाल पेश कर रहा है.
एक छत के नीचे रहते हैं 31 मेंबर्स
यहां एक ही छत के नीचे 31 सदस्य प्रेम और सौहार्द के साथ रहते हैं. हर समय घर का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं होता. खास अवसरों पर यह माहौल जन्नत जैसा प्रतीत होता है. परिवार के सभी सदस्य इतने अच्छे तालमेल से रहते हैं कि कोई भी इस एकता को देखकर प्रेरित हो सकता है. महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी मिल- जुलकर अपना- अपना काम करते हैं. यहां कभी किसी प्रकार की टकराव की स्थिति नहीं बनती. जब किसी को किसी की जरूरत होती है, तो हर कोई तुरंत मदद को तैयार रहता है.
1966 से चल रही एकता की परंपरा
झज्जर के बेरी स्थित बाकरा गांव का कौशिक परिवार पिछले कई सालों से समाज के लिए एक आदर्श बना हुआ है. 1966 में दयाराम कौशिक ने अपने तीनों बेटों- हरिराम, धर्मचंद और यादराम के लिए घर का निर्माण कराया था. समय के साथ यह परिवार अब 31 सदस्यों तक पहुंच गया है. हालांकि, हरिराम और धर्मचंद का निधन हो चुका है, लेकिन उनके परिवार के सदस्य आज भी एक छत के नीचे पारिवारिक मूल्यों को सहेजे हुए हैं.
पढ़ाई और नौकरी में भी आगे
परिवार के सदस्य पढ़- लिखकर समाज में अपनी पहचान बना चुके हैं. कई सदस्य सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं. परिवार के एक पोते ने आईआईटी से पढ़ाई पूरी की है. पुरुषोत्तम कौशिक, जो रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. उनके चाचा और रिटायर्ड पुलिसकर्मी यादराम कौशिक ने हमेशा परिवार को एकजुट रहने का संदेश दिया. अब उनकी अगली पीढ़ी भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है. पुरुषोत्तम अपने दोनों बेटों और 2 भतीजों के साथ एक ही घर में रहते हैं. परिवार के छह बच्चे मजबूरीवश दूसरे शहरों में रह रहे हैं.
परिवार का पूरा विवरण
हरिराम के तीन बेटे हुए रामधारी, डीघराम और पुरुषोत्तम. डीघराम के बेटे हरीश और धीरज हैं. पुरुषोत्तम के दो बच्चे नैना और हिमांशु हैं. धर्मचंद के बेटे नवीन हैं, जिनके दो बच्चे मानविक और नियारत हैं. यादराम के बड़े बेटे राधेश्याम शर्मा हैं, जिनके दो बच्चे रॉयल और यूनिक हैं. यादराम के छोटे बेटे फूल कुमार के तीन बच्चे रिया, जिया और तुषार हैं. घर के सभी काम मिलजुल कर किए जाते हैं. महिलाएं घरेलू कामों में एक- दूसरे का सहयोग करती हैं. घर के बड़े सदस्य बाहर के कार्यों को संभालते हैं. बच्चे एक- दूसरे की पढ़ाई में मदद करते हैं.
