महेंद्रगढ़ | जिंदगी में कई रिश्ते वक्त के साथ बनते और बिगड़ते रहते हैं, लेकिन सच्ची दोस्ती का बंधन हमेशा दिल के सबसे करीब रहता है. एक अच्छा दोस्त वही होता है जो खुशियों में साथ मुस्कुराए और मुश्किल वक्त में बिना कुछ कहे साथ खड़ा हो जाए. कई बार दोस्तों का भरोसा, सहयोग और उनकी छोटी- सी प्रेरणा इंसान की पूरी सोच और जिंदगी की दिशा ही बदल देती है. वर्षों पुरानी दोस्ती की यही खूबी होती है कि समय बीतने के बाद भी अपनापन, सम्मान और विश्वास पहले जैसा ही बना रहता है. ऐसी ही कुछ यादगार दोस्तियों की कहानियां जीवन के अनमोल अनुभवों को सामने लाती हैं.

कप्तान जगराम आर्य जोकि केशव नगर नारनौल महेंद्रगढ़ के रहने वाले हैं, वह बताते हैं कि 11 साल की उम्र तक वे स्कूल से दूर थे और उनका भविष्य धुंधला नजर आता था. ऐसे मुश्किल वक्त में उनके मित्र किरोड़ीलाल शर्मा ने उनका हाथ थामा और उन्हें शिक्षा की राह दिखाई.
जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
वे खुद उन्हें स्कूल लेकर गए और पहले ही दिन एक से सौ तक गिनती सिखाकर उनका मन पढ़ाई में रमा दिया. उन्हीं की प्रेरणा से जगराम ने एमए तक की पढ़ाई पूरी की और सेना में धर्मगुरु के पद पर रहते हुए कप्तान के रूप में सेवानिवृत्त हुए. यह दोस्ती उनके जीवन का सबसे अनमोल उपहार है. डॉ. पंकज गौड़ बताते हैं कि उनके मित्र डॉ. विक्रम सिंह जीवन के ऐसे साथी हैं जिन्होंने हर सुख- दुख, हर सफलता- नाकामी और हर कठिन घड़ी में उनका साथ निभाया है.
उनके साथ बिताए पल मन को सुकून और नई ऊर्जा देते हैं. उनका स्नेह, सरल स्वभाव और सकारात्मक सोच हमेशा प्रेरणा का काम करती है. सच्चा और भरोसेमंद दोस्त जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होता है, और वे खुद को खुशनसीब मानते हैं कि उन्हें ऐसा दोस्त मिला.
शहर में अलग ही पहचान
डॉ. संजय शर्मा बताते हैं कि साल 1988 में शुरू हुई उनकी दोस्ती आज भी उसी प्यार, भरोसे और अपनेपन के साथ कायम है. जीवन के मुश्किल दौर में उनके मित्र बंसी लाल का बिना किसी स्वार्थ के दिया गया साथ उनके लिए अनमोल तोहफे जैसा रहा. विद्यालय भवन के निर्माण जैसे चुनौतीपूर्ण काम में उनका सहयोग हमेशा याद रहेगा. दोनों की दोस्ती इतनी खास रही कि उन्होंने मिलकर शहर में पहली बार सिल्वर जुबली का भव्य आयोजन किया, जिसकी यादें आज भी उनके दिल में बसी हुई हैं. भीमसेन पांडे बताते हैं कि उनका और राकेश शर्मा का रिश्ता वर्षों पुराना है और उनकी जोड़ी ने शहर में अपनी अलग ही पहचान बनाई है.
आज भी अगर किसी कार्यक्रम में दोनों में से कोई एक अकेला नजर आए तो लोग फौरन दूसरे के बारे में पूछ बैठते हैं. मां चामुंडा के दरबार से लेकर पारिवारिक आयोजनों तक… दोनों की दोस्ती और साथ की चर्चा हमेशा होती रहती है और भीमसेन इसे अपने लिए गर्व और खुशी की बात मानते हैं.