चंडीगढ़ | हरियाणा के बिजली निगमों में फील्ड ड्यूटी करने वाले करीब 25 हजार तकनीकी कर्मचारियों के लिए जोखिम भत्ते यानी रिस्क अलाउंस को लेकर नई नीति तैयार की जाएगी. इसके लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. इस समिति में मुख्य अभियंता, परिचालन, अधीक्षण अभियंता मानव संसाधन, अधीक्षण अभियंता परिचालन, कार्यकारी अभियंता परिचालन और वरिष्ठ लेखा अधिकारी वित्त एवं बजट को शामिल किया गया है.

यह समिति पड़ोसी राज्यों में लागू जोखिम भत्ता व्यवस्था का अध्ययन करेगी. इसी आधार पर तय करेगी कि हरियाणा में किन कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिया जाए, उसकी पात्रता क्या हो और भुगतान किस तरीके से किया जाए. इसके बाद, समिति अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी.
जोखिम भत्ता
हरियाणा के बिजली निगमों में बड़ी संख्या में कर्मचारी रोजाना हाई वोल्टेज लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों, बिजली आपूर्ति बहाल करने और फॉल्ट ठीक करने जैसे जोखिम भरे काम करते हैं. कई बार खराब मौसम और विषम परिस्थितियों में भी उन्हें मौके पर जाकर काम करना पड़ता है, जिसकी वजह से लंबे समय से ऐसे कर्मचारियों के लिए जोखिम भत्ता देने की मांग उठती रही है. रिपोर्ट में इस बारे में पांच सुविधाओं पर मुहर लगने की संभावना जताई गई है.
इन 5 सुविधाओं पर मुहर
- जोखिम आधारित भत्ता केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो हाई वोल्टेज लाइन, ट्रांसफॉर्मर और बिजली आपूर्ति बहाली जैसे जोखिम भरे कार्य करते हैं.
- लाइनमैन, सहायक लाइनमैन, जूनियर इंजीनियर और अन्य फील्ड तकनीकी कर्मचारियों के लिए पद के अनुसार अलग- अलग दरों पर भत्ता तय किया जाएगा.
- किन कर्मचारियों को भत्ता मिलेगा, कितने दिन फील्ड ड्यूटी करने पर मिलेगा और किन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा, इसके लिए स्पष्ट पात्रता नियम बनाए जाएंगे.
- जोखिम भत्ते को वेतन का नियमित हिस्सा बनाकर हर महीने भुगतान करने की व्यवस्था की जाएगी, न कि सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही यह मिलेगा.
- सुरक्षा उपकरणों के अनिवार्य इस्तेमाल, प्रशिक्षण और जोखिम भरे कार्यों के वर्गीकरण के आधार पर भत्ता तय करने की व्यवस्था भी की जाएगी.
जताई जा रही उम्मीद
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि बिजली निगम कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए नई नीति बनाने का फैसला लिया गया है. उनके मुताबिक, समिति इस पूरी योजना की व्यावहारिकता, पात्रता और वित्तीय प्रभाव का बारीकी से अध्ययन करेगी. फिलहाल, बिजली निगमों में जोखिम भत्ता देने के लिए कोई एक समान व्यवस्था मौजूद नहीं है, अलग-अलग प्रावधान होने की वजह से सभी तकनीकी कर्मचारियों को समान लाभ नहीं मिल पाता. नई नीति लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है.