चंडीगढ़ | हरियाणा में मानसून के सबसे अहम महीने जुलाई में इस बार बारिश उम्मीद से कहीं कम रही. भारतीय मौसम विभाग की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में जुलाई के दौरान 109.3 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस महीने का सामान्य औसत 149.1 मिमी माना जाता है. यानी पूरे प्रदेश में करीब 40 मिमी कम और 27 फीसदी कम बारिश हुई. इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी और मध्य हरियाणा में देखने को मिला, जहां ज्यादातर जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई.

IMD के पिछले 26 सालों (2000 से 2026) तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2003 में जुलाई के दौरान 306.4 मिमी बारिश के साथ सबसे ज्यादा वर्षा दर्ज हुई थी, जबकि 2004 में महज 21 मिमी बारिश हुई थी, जो 26 सालों का सबसे सूखा जुलाई महीना रहा.
हरियाणा मौसम अपडेट
2021, 2022 और 2023 में लगातार सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई थी, लेकिन 2024 में गिरावट आने के बाद अब 2026 में एक बार फिर बड़ा रेन डेफिसिट दर्ज किया गया है. प्रदेश के कुल 22 जिलों में से 15 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई. सबसे ज्यादा कमी सिरसा में देखी गई, जहां 74 फीसदी तक बारिश कम हुई, इसके बाद जींद और रोहतक में भी 66-66 फीसदी की कमी दर्ज हुई. हिसार में 45 फीसदी और कैथल में 43 फीसदी कम बारिश हुई. वहीं दूसरी तरफ पलवल, कुरुक्षेत्र और फरीदाबाद जैसे जिलों में सामान्य से ज्यादा वर्षा दर्ज की गई.
सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, जींद और रोहतक का इलाका कपास और बाजरे की खेती के लिए जाना जाता है. यहां सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज होने से सिंचाई पर निर्भरता बढ़ने की आशंका है. अगर हिसार और सिरसा जैसे जिलों में जुलाई की यह कमी अगस्त में पूरी नहीं हो पाई, तो इसका असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है.
यहां ज्यादा असर
अगर जिलेवार बारिश की स्थिति देखें, तो उत्तर हरियाणा में अंबाला और पंचकूला में सामान्य के मुकाबले करीब आधी बारिश दर्ज हुई, जबकि कुरुक्षेत्र में 20 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और करनाल में सिर्फ 12 फीसदी की कमी रही. दक्षिण हरियाणा में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नूंह में कमी सीमित रही, वहीं पलवल में सामान्य से 30 फीसदी ज्यादा बारिश हुई और गुरुग्राम में महज 7 फीसदी की कमी दर्ज हुई. पश्चिम हरियाणा में सिरसा, हिसार और फतेहाबाद सबसे ज्यादा प्रभावित जिले रहे, जो खरीफ खेती के लिहाज से सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है.
मध्य हरियाणा के रोहतक, जींद, कैथल और सोनीपत में सामान्य से 43 से 66 फीसदी तक कम बारिश दर्ज हुई, जिस वजह से यह पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा रेन डेफिसिट जोन बनकर उभरा है.
मानसून सक्रिय होने की उम्मीद
हरियाणा में मानसून उत्तर और उत्तर- पूर्वी जिलों पर ज्यादा मेहरबान नजर आ रहा है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में बारिश की रफ्तार अब भी धीमी बनी हुई है. मौसम विभाग चंडीगढ़ के मुताबिक, 1 अगस्त को पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में गरज- चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है. दूसरी तरफ हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में सिर्फ छिटपुट जगहों पर हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है जबकि 3 और 4 अगस्त से मानसून के फिर सक्रिय होने की उम्मीद है.