भिवानी | हरियाणा में भिवानी की बॉक्सर प्रीति पंवार ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में फाइनल में जगह बनाकर हरियाणा का नाम रोशन किया है. उन्होंने 54 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में जाम्बिया की कैथरीन मवापे को 5-0 से मात दी. अब प्रीति शनिवार को खिताबी मुकाबला खेलेंगी. बड़सेरा गांव की रहने वाली प्रीति सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं. वहीं, उनके पिता सोमवीर हरियाणा पुलिस में असिस्टेंट सब- इंस्पेक्टर हैं.

इससे पहले प्रीति 2022 के एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल और 2025 विश्व कप में गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. इसी बीच हिसार के बॉक्सर अंकुश पंघाल आज शाम सेमीफाइनल मुकाबला खेलेंगे, जिसमें 80 किलो वेट कैटेगरी में उनका मुकाबला कनाडा के जोशुआ ओफोरी से होगा.
मेडल हासिल
भिवानी की डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरमन ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और तमगा जोड़ लिया. सीमा ने तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर दूर चक्का फेंककर यह मेडल हासिल किया. ब्रॉन्ज जीतने वाली सीमा कालीरमन का सफर भी कम प्रेरणादायक नहीं रहा. भिवानी जिले के दिनोद गांव की 27 वर्षीय सीमा चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं. साल 2022 में बेटे रुद्र के जन्म के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई थीं. प्रेग्नेंसी के चलते वे दो सीजन तक प्रतियोगिताओं से दूर रहीं, लेकिन बेटे के जन्म के महज 11 महीने बाद ही उन्होंने दोबारा कड़ी ट्रेनिंग शुरू कर दी.
प्रेग्नेंसी के बाद खोई फिटनेस, ताकत और तकनीक फिर से हासिल करने के लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा, जिसका फल अब उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल के रूप में मिला है.
पति रविंद्र का योगदान
सीमा की इस कामयाबी के पीछे उनके पति रविंद्र का बड़ा योगदान रहा है. रविंद्र खुद जूनियर और सब-जूनियर स्तर के राष्ट्रीय चैंपियन डिस्कस थ्रोअर रह चुके हैं, मगर चोट के चलते उनका खेल करियर आगे नहीं बढ़ पाया. उन्होंने अपना सारा अनुभव सीमा को निखारने में लगा दिया. दोनों की मुलाकात भी डिस्कस थ्रो के मैदान पर ही हुई थी और सीमा के पिता ने भी इसी उम्मीद में रविंद्र से शादी की मंजूरी दी थी कि उनकी बेटी का खेल करियर संवर सकेगा. कोरोना काल में भी रविंद्र ने सीमा को खेल के साथ- साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स साइंस में पीएचडी की शुरुआत की.