नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली की पहचान बन चुके कूड़े के पहाड़ अब आने वाले समय में हरियाली के लिए जाने जाएंगे. लैंडफिल खत्म करने की चल रही मुहिम के बाद खाली हुई जमीन को एमसीडी अब हरित क्षेत्र में तब्दील करने में जुट गई है ताकि सर्दियों के मौसम में धूल से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके. इसी कड़ी में एमसीडी ने ओखला लैंडफिल की 5 एकड़ भूमि पर दूब घास लगाकर इस इलाके को हरित क्षेत्र में बदलने का काम शुरू कर दिया है. प्रयोग के तौर पर यह भी देखा जा रहा है कि घास को जीवित रखने के लिए नियमित सिंचाई और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं कैसे की जाएं.

महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि ओखला लैंडफिल पर जो पुराना कचरा जमा था, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. फिलहाल, वहां जो कचरा बचा है वह पिछले दो- तीन सालों के दौरान जमा हुआ है जिसके निस्तारण का काम भी शुरू हो चुका है. उनके मुताबिक इस साल के अंत तक इस लैंडफिल साइट को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा.
23 एकड़ जमीन खाली!
उन्होंने बताया कि लैंडफिल साइट पर करीब 23 एकड़ जमीन अब तक खाली हो चुकी है, जिस पर पहले बांस के पौधे लगाए गए थे. अब पांच एकड़ जमीन पर घास लगाई जा रही है, ताकि मिट्टी से ढकी यह खाली जमीन तेज हवा चलने पर धूल में तब्दील न हो जाए और वायु प्रदूषण रोकने में मदद मिल सके. एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दूब घास के साथ-साथ वेटिवर यानी खस और लेमनग्रास को भी परीक्षण के तौर पर लगाया जा रहा है. आगे चलकर गेंदा और बोगनवेलिया जैसे फूलदार पौधे भी रोपे जाएंगे. अधिकारी के अनुसार, ओखला लैंडफिल तीनों कूड़ा पहाड़ों में पहला ऐसा स्थल बन सकता है, जहां से पुराना कचरा पूरी तरह हट जाएगा.
ओखला लैंडफिल की शुरुआत
जो जमीन खाली हुई है उसे हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. मानसून का मौसम घास के लिए अनुकूल माना जाता है और दूब घास विपरीत परिस्थितियों में भी आसानी से उग जाती है, इसीलिए इसे प्राथमिकता दी गई है. साथ ही, प्रयोग के तौर पर लेमनग्रास और खस घास भी लगाई गई है. ओखला लैंडफिल की शुरुआत साल 1996 में 62 एकड़ जमीन पर हुई थी. साल 2019 तक यह कूड़े का पहाड़ करीब 60 मीटर ऊंचा हो चुका था, जिसके बाद कचरा निस्तारण का काम शुरू हुआ. शुरुआत में इसे दो साल के भीतर खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसकी समय-सीमा इसी साल के अंत तक तय की गई है.
एमसीडी के आंकड़ों के अनुसार, 8 जून तक तीनों लैंडफिल साइटों पर कुल 99.7 लाख टन पुराना कचरा बचा हुआ था. इनमें ओखला में 12.29 लाख टन, भलस्वा में 18.43 लाख टन और गाजीपुर में सबसे ज्यादा 68.99 लाख टन कचरा शेष है. फिलहाल, अब तक ओखला लैंडफिल से करीब 23 एकड़ जमीन कचरे से मुक्त कराई जा चुकी है.