नई दिल्ली | आज ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूरे प्रभाव में होगा. हिंदू धर्म में यह दिन खासा महत्व रखता है. आज की रात और भी ज्यादा खास होने वाली है क्योंकि आज आसमान में रहस्यमयी स्ट्रॉबेरी मून देखने को मिलेगा. इसके बाद साल 2043 तक ऐसा पल देखने को नहीं मिलेगा. यह भारत समेत दुनिया के कई इलाकों में देखा जाएगा. रात के सन्नाटे में जब पूर्णिमा का चांद आसमान में दिखाई देगा तब यह आमतौर पर दिखने वाले चांद जैसा नहीं दिखाई देगा बल्कि इसमें हल्की गुलाबी या सुनहरी आभा नजर आएगी जो इसको और ज्यादा रहस्यमयी बना देगी.
भारत में सूर्यास्त के बाद दिखेगा खास नजारा
भारत में इसे देखने का आदर्श समय आज सूर्यास्त के बाद होगा. चंद्रमा दक्षिण-पूर्वी क्षितिज पर नीचा दिखाई देगा जो अपनी किरणों से लोगों को शीतलता और सुकून प्रदान करेगा. इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए आप दूरबीन या टेलिस्कोप का सहारा ले सकते हैं. आमतौर पर इस प्रकार की दुर्लभ घटना हर 18.6 साल में घटित होती है. पूर्णिमा के दौरान इसका सबसे ज्यादा प्रभाव दिखाई देता है. आज के बाद साल 2043 में इस प्रकार का चांद देखने को मिलेगा.
ये है इसका रोचक इतिहास
इसकी पृथ्वी से थोड़ी अधिक दूरी होने के चलते यह सामान्य से थोड़ा छोटा और धुंधला दिखाई देगा. यह केवल नाम की वजह से ही स्ट्रॉबेरी नहीं कहलाता बल्कि इसके माइक्रो मून और मेजर लूनर स्टैंडस्टिल की वजह से भी यह बेहद खास होता है. इसका रंग स्ट्रॉबेरी जैसा नहीं होता. इसका नाम अमेरिकी आदिवासी परंपराओं से जुड़ा होता है क्योंकि स्ट्रॉबेरी की कटाई की शुरुआत जून में इसी पूर्णिमा के बाद शुरू होती थी.
ध्यान और साधना के लिए उत्तम समय
इसी कारण इसका नाम ऐसा रखा गया है. चंद्रमा पृथ्वी से इस वर्ष सबसे अधिक दूरी पर होगा जिस कारण यह सामान्य से छोटा और नीचे दिखाई देगा. स्ट्रॉबेरी मून का यह नजारा दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और बैंगलोर जैसे शहरों में रात 7 बजे के बाद दिखाई देगा. आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसे खास माना जाता है.
पूर्णिमा की रात मानसिक ऊर्जा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. ध्यान, साधना या किसी नई शुरुआत के लिए यह काफी अच्छा समय माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार आज का दिन गंगा स्नान, दान या तपस्या के लिए भी काफी शुभ माना जाता है.
