चंडीगढ़ | साल 2019 में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) में लोअर डिवीजन क्लर्क के पदों पर भर्ती की गई थी. कुल 946 LDC को चयनित किया गया था. यह भर्ती एक बार फिर चर्चा में आ गई है. बिजली वितरण निगमों द्वारा एलडीसी (लोअर डिविजन क्लर्क) के पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सूचना देने में अपनाई गई दोहरी प्रणाली ने न्यायपालिका को अचरज में डाल दिया है.
रवैया नहीं होगा नजरअंदाज
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से इसे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सीधा प्रहार माना है. हाई कोर्ट की तरफ से रजिस्ट्रार विजिलेंस को जांच के आदेश दिए गए है. कोर्ट की ओर से साफ कहा गया है कि इस प्रकार के भेदभावपूर्ण रवैये को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यदि इसमें जानबूझकर गड़बड़ी की गई है, तो उसकी तह तक जाना न्याय का फर्ज है.
जस्टिस हरकेश मनुजा का कहना है कि एलडीसी (लोअर डिविजन क्लर्क) के पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सूचना देने में जिस प्रकार से 2 अलग- अलग तरीके अपनाए गए, चयन प्रक्रिया को निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गहरा शक पैदा करता है.
सूचना देने के तरीकों में गंभीर विसंगतियां
कोर्ट के सामने प्रस्तुत रिकार्ड के मुताबिक हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 2019 में 946 एलडीसी के पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिनमें 478 पद दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) और 486 पद उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) के लिए थे. सिलेक्शन प्रक्रिया के बाद दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को पहले 419 और फिर 71 उम्मीदवारों की अनुशंसा मिली. हाई कोर्ट ने देखा कि सूचना देने के तरीकों में गंभीर विसंगतियां देखने को मिली है.
190 में से सिर्फ 20 ने किया ज्वाइन
240 उम्मीदवारों को व्यक्तिगत मैसेंजर के जरिये सूचना दी गई, जिनमें से 220 ने ज्वाइनिंग दी. व 190 उम्मीदवारों को डाक के जरिये सूचना भेजी गई, मगर इनमें से सिर्फ 20 ने ही ज्वाइन किया. कोर्ट ने जब भारतीय डाक सेवा की वेबसाइट पर रैंडम डाक रसीदों की जांच करवाई, तो पाया गया कि ज्यादातर डाक को कोई पुष्टि नहीं मिली.
DHBVN के मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक कुमार गर्ग, जो वीडियो कानफ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थे, यह नहीं बता पाए कि राज्य सरकार या बिजली विभाग की तरफ से सूचना देने के लिए कोई लिखित निर्देश जारी किए गए थे या नहीं.
हाईकोर्ट ने दिए रजिस्ट्रार विजिलेंस को निर्देश
कोर्ट ने साफ कहा कि अधिकारियों द्वारा चयनित उम्मीदवारों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया जो न्याय संगत श्रेणी की कसोटी पर सही नहीं है और उनकी कार्यप्रणाली किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी. हाई कोर्ट ने विजिलेंस जांच के ऑर्डर देते हुए अपने रजिस्ट्रार विजिलेंस को निर्देश दिए हैं कि वह जाँच करें कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में चयनितों को इनफार्मेशन देने के लिए लिखित नीति, नियम या दिशा- निर्देशों दिए गए है या नहीं.
