हौसला देखिए: 92 फीसदी फेफड़े कोरोना संक्रमित फिर भी 80 साल के फौजी ने जीत ली कोरोना से जंग

जींद । देश में कोरोना वायरस संक्रमण बहुत ही घातक सिद्ध हो रहा है. इसकी वजह से अनेकों लोग अपनी जान गवा रहे हैं. परंतु कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने हिम्मत रखी है और कोरोना से जंग जीत कर अपने घर लौटे हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही बुजुर्ग की कहानी बताएंगे जिसने कोरोना को मात दी है. इन बुजुर्ग का नाम है फौजी सूबे सिंह गोयत, जिनकी उम्र 80 साल है. इन्होंने सन 1971 में भारत पाकिस्तान की लड़ाई में पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटाई थी और अब इन्होंने कोरोना वायरस को मात दी है और वह भी इस हालत में जब उनके फेफड़े 92% तक कोरोना से संक्रमित हो गए थे. इनकी रिकवरी होने को डॉक्टर भी एक चमत्कार मान रहे हैं.

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मीडिया से बातचीत करते हुए सूबे सिंह ने कहा है कि मैंने जिंदगी में कभी डरना तो सीखा ही नहीं. मैं एक फौजी हूं. दुश्मनों अर्थात दुश्मन सैनिकों के विपरीत परिस्थिति में भी छक्के छुड़ाए हैं. जान हथेली पर रखकर कश्मीर में ड्यूटी की है. उस समय हम नहीं डरे तो अब इस कोरोना से क्या डरना. उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल को उन्हें बुखार आया था. पोते ने 19 अप्रैल को कोरोना का सैंपल दिलवाया और टेस्ट करवाया. 24 को रिपोर्ट आई कि कोरोना पॉजिटिव हूं. फिर घर पर ही दवाई दे रहे थे.

लेकिन 26 अप्रैल की रात्रि के समय परेशानी बहुत अधिक बढ़ गई. अगले दिन ही बच्चों ने सुबह-सुबह एक निजी हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया. सीटी स्कैन करवाया गया जिसमें स्कोर 25 में से 23 मिला. ऑक्सिजन लेवल भी बेहतर था जो 67 था. इस संबंध में सूबे सिंह के बेटे ईश्वर गोयत कहते हैं कि सीटी स्कैन का स्कोर देखकर चिकित्सकों ने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है. हम अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगे, परंतु कुछ भी हो सकता है. बाद में हम पर दोष मत डालिएगा. सुबह सिंह के बेटे ईश्वर सिंह बीएसएफ में इंस्पेक्टर है.

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चौथे दिन हॉस्पिटल में साथ वाले बेड पर एक बुजुर्ग की मृत्यु हो गई थी. यह देखकर सुबे सिंह का मन खट्टा हो गया. डॉक्टर ने उसी दिन कहा कि सूबे सिंह को डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है. उसी समय उन्हें एक गवर्नमेंट हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया. वहां पर इनका उपचार फिजीशियन डॉ नरेश वर्मा ने आरंभ किया.

फिर तीसरे दिन उन्हें ऑक्सीजन से हटा दिया गया और उन्होंने सुबह शाम अनुलोम-विलोम करना आरंभ कर दिया. खाना खाना भी नहीं छोड़ा, जो मन किया, कभी कढ़ी तो कभी खिचड़ी खाई, चीकू , सेब, अंगूर भी खाते रहे. धीरे-धीरे उनकी रिकवरी होती गई. यह देखकर डॉक्टर भी चकित रह गए. जब उनका ऑक्सीजन लेवल 90 से ऊपर हो गया तो 7 मई को उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज दे दिया गया. अब सूबे सिंह अपने घर पर स्वस्थ हैं और ताजी हवा में सुबह-शाम बैठकर अनुलोम विलोम और भ्रमरी प्राणायाम करते हैं.

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Sahil Maurya
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