नई दिल्ली, New Labour Laws | देश के सभी मजदूरों और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार (Central Govt) ने नियमों में बदलाव किए है. सरकार ने पुराने 29 कानूनों को मर्ज करते हुए 4 नए लेबर कोड लेकर आई है. ये कोड- वेजेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस, सोशल सिक्योरिटी और सेफ्टी- हेल्थ पर है. नए कोड से अनौपचारिक सेक्टर, गिग वर्कर्स, प्रवासी मजदूरों और महिलाओं को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य- सुरक्षा की फुल गारंटी मिलेगी.
श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया है कि 4 नए लेबर कोड के ड्राफ्ट रूल्स बहुत जल्द ही प्री- पब्लिश कर दिए जाएंगे. इसके बाद, 5 दिनों तक कोई भी सुझाव दे सकेगा, उसके बाद ही फाइनल नोटिफिकेशन आएगा. उन्होंने कहा कि नए लेबर कोड अगले वित्तीय वर्ष अप्रैल 2026 तक देश में पूरी तरह लागू हो जाएंगे.
नए लेबर कोड्स
भारत में पहले 29 अलग- अलग लेबर लॉज थे. इन्हें लेकर लोगों में बहुत कंफ्यूजन था. इसीलिए लोगों की सहूलियत के अनुसार इन्हें 4 कोड में शामिल कर दिया गया है. ये कोड कोड ऑन वेजेज ( 2019 ), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी ( 2020) और OSHWC कोड (2020) है.
जानिए क्या है खास?
- फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल लगातार काम करना जरूरी था. अब फिक्स्ड- टर्म पर काम करने वाले कर्मचारी भी मात्र 1 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे.
- कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा सुधार किया है. अब कंपनी के साथ- साथ प्रिंसिपल एम्लॉयर भी कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसी ही ग्रेच्युटी देने के लिए जिम्मेदार होगा. अब कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स को भी एक साल की सर्विस पर ग्रेप्युटी मिलेगी.
- नए कोड्स में सोशल सिक्योरिटी को मजबूत किया गया है. इसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स जैसे उबर ड्राइवर या फूड डिलीवरी बॉय को हेल्थ इश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और सोशल सिक्योरिटी मिलेगी. अब एम्प्लॉयर्स को वेज का 0.65 % EDLI स्कीम में कंट्रीब्यूट करना होगा. इससे इन कर्मचारियों को लाइफ और डिसेलिबिटी करवेज, हेल्थ बेनिफेट भी मिलेंगे.
- नए कोड्स में टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की लिमिट 20 लाख रुपए तक बढ़ाई गई है. पहले ये लिमिट 10 लाख रुपए थी. एम्प्लॉयर को ग्रेच्युटी 30 दिनों के अंदर पे करनी होगी. अगर देरी हुई, तो 10% सलाना ब्याज लगेगा. ये नियम प्राइवेट- पब्लिक सेक्टर दोनों में लागू होगा.
- अब किसी भी कंपनी के लिए कर्मचारी को काम पर रखते ही अपाइंटमेंट लेटर देना कानूनी रूप से देना अनिवार्य होगा. इससे जॉब सिक्योरिटी और ट्रांसपिरेंसी बढ़ेगी. आपकी बेसिक सैलरी कुल CTC का कम- से- कम 50% होनी चाहिए. इसका मतलब है कि आपकी टेक- होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन PF और ग्रेच्युटी में ज्यादा पैसा जमा होगा.
- पहले Earned leave के लिए साल में 240 दिन काम करना जरूरी था जिसे घटाकर अब 180 दिन कर दिया गया है. इसके अलावा यदि आप एक्स्ट्रा काम करते है तो कंपनी को आपको डबल पेमेंट किया जाएगा. यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है या उसे निकाला जाता है, तो कंपनी को 2 वर्किंग डे के अंदर उसका फुल एंड फाइनल सेंटलमेंट करना होगा.
- मैटरनिटी लीव 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दी गई, जो महिलाओं के लिए बड़ी राहत है. पहली बार पैटरनिटी लीव 15 दिन और अप्डॉशन लीव भी इंट्रोड्यूस की गई. 3 महीने की सर्विस के बाद फिक्स्ड- टर्म एम्प्लॉजी को भी परमानेंट वर्कर्स जितने ही फायदे मिलेंगे.
