ज्योतिष | सूर्य किसी भी राशि में भ्रमण करते हैं तो इसे संक्रांति कहा जाता है. सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करने के लिए जाने जाते हैं, उसका प्रभाव लगभग सभी 12 राशि के जातक को पर दिखाई देता है. कुछ राशि के जातकों की किस्मत चमक जाती है तो कुछ की परेशानी बढ़ जाती है. हर सक्रांति अपने आप में खास महत्व रखती है, परंतु इन्हीं में 2 बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. पहली मकर संक्रांति तो दूसरी कर्क संक्रांति. आज हम आपको मकर संक्रांति के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
मकर संक्रांति का पर्व
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं,तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है. कहा जाता है कि मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती है, ऐसे में सूर्य की उपासना की जाती है. इस समय सूर्य देव उत्तरायण भी होते हैं दान स्नान आदि के लिए यह समय काफी अच्छा माना जाता है. इन दिनों को देवताओं के दिन कहा जाता है, इस दिन सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करने के साथ- साथ अर्घ देने का भी विशेष महत्व बताया गया है.
अबकी बार मकर संक्रांति की शुरुआत दोपहर के समय में हो रही है, ऐसे में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन महापुण्य काल दोपहर 3:13 से शुरू होकर 4:58 मिनट तक रहेगा. वहीं, पुण्य दोपहर 3:30 मिनट से शाम 5:40 तक रहने वाला है.
इस वजह से है खास
आप भी सोच रहे होंगे कि मकर संक्रांति को इतना विशेष महत्व क्यों प्राप्त है. हम आपकी जानकारी के लिए बता दे की मकर राशि भगवान शनि देव की कहलाई जाती है और सूर्य और शनि में मित्रता का संबंध बिल्कुल भी नहीं है. दोनों एक दूसरे के शत्रु ग्रह माने जाते हैं. सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसका अर्थ है कि वह शनि की राशि में प्रवेश कर रहे है. इसी वजह से दोनों ग्रह एक दूसरे के प्रभाव में आते हैं तो खरमास का महीना समाप्त हो जाता है. इसी वजह से मकर संक्रांति का पर्व काफी खास होता है. 1 महीने से जो शुभ कार्य बंद हो गए थे, वह इस दिन से फिर से शुरू हो जाते हैं.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
