यमुनानगर | अगर आप घूमने के लिए किसी नए और शांत पर्यटन स्थल की तलाश में हैं, तो हरियाणा का यमुनानगर जिला आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यहां प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक स्थल और धार्मिक आस्था का ऐसा संगम देखने को मिलता है जो पर्यटकों को अपनी ओर खींच लेता है. घने जंगलों से लेकर प्राचीन मंदिरों और विशाल बैराज तक. यह जिला कई खास जगहों के लिए जाना जाता है. यहां पहुंचना भी आसान है और परिवार या दोस्तों के साथ एक दिन या दो दिन का शानदार ट्रिप प्लान किया जा सकता है.
यमुनानगर का कलेसर नेशनल पार्क प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है. शिवालिक पर्वतमाला की गोद में बसे इस पार्क को वर्ष 2003 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था.
हरियाणा का इकलौता हाथी पुनर्वास केंद्र
करीब 11 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला यह जंगल जैव विविधता से भरपूर है. यहां सांभर, चीतल, नीलगाय, गोरल, जंगली सुअर और कई प्रकार के पक्षी आसानी से देखे जा सकते हैं. हाल के दिनों में राजाजी नेशनल पार्क से आए हाथियों का झुंड भी यहां देखा गया है जिससे पर्यटकों की उत्सुकता और बढ़ गई है. जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित आदिबद्री धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान है. हरे- भरे पहाड़ों के बीच बसे इस क्षेत्र को प्राचीन सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है.
यहां मौजूद श्री केदारनाथ मंदिर और आदिबद्री नारायण मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं. वसंत पंचमी के अवसर पर यहां सरस्वती महोत्सव भी आयोजित किया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं.
इतिहास और सिख परंपरा की झलक
बिलासपुर के पास स्थित कपालमोचन धार्मिक स्थल का भी अपना ऐतिहासिक महत्व है. मान्यता है कि 1687 में गुरु गोबिंद सिंह ने युद्ध के बाद यहां अपने अस्त्र- शस्त्र धोए थे और कुछ समय यहीं विश्राम किया था. यहां तीन पवित्र सरोवर कपालमोचन. ऋणमोचन और सूरजकुंड श्रद्धालुओं के लिए खास माने जाते हैं. वहीं, लोहगढ़ को सिख इतिहास में पहली राजधानी का दर्जा प्राप्त है. जिसे बाबा बंदा सिंह बहादुर ने स्थापित किया था. यमुना नदी पर बना हथनीकुंड बैराज भी यमुनानगर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है. 1999 में शुरू हुए इस बैराज से दिल्ली और उत्तर प्रदेश की नहरों में पानी का बंटवारा किया जाता है.
मानसून के समय यहां का नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचते हैं. यहां पर्यटकों के लिए एक थीम पार्क भी विकसित किया जा रहा है जिसमें आर्टिफिशियल झील, बच्चों के लिए पार्क और कई मनोरंजन सुविधाएं होंगी.
हाथी पुनर्वास केंद्र की खास पहचान
यमुनानगर के प्रतापनगर क्षेत्र में स्थित ताऊ देवी लाल हर्बल पार्क भी पर्यटकों को आकर्षित करता है. करीब 184 एकड़ क्षेत्र में फैले इस पार्क में 350 से अधिक दुर्लभ औषधीय पौधों का संग्रह किया गया है. वैज्ञानिक और शोधकर्ता यहां अध्ययन के लिए आते हैं. इसके अलावा, बनसंतौर में बना हाथी पुनर्वास केंद्र भी खास है जहां घायल या बचाए गए हाथियों की देखभाल की जाती है.
कालेश्वर महादेव मंदिर
जिले के अमादलपुर गांव में स्थित सूर्यकुंड मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है. मान्यता है कि यहां सूर्य ग्रहण का असर नहीं पड़ता. कलेसर जंगल में स्थित कालेश्वर महादेव मठ में स्वयंभू शिवलिंग होने की मान्यता है. जहां दूर- दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. यमुनानगर ऐसा जिला है जहां प्रकृति, इतिहास और धार्मिक आस्था तीनों का अनोखा मेल देखने को मिलता है. यहां आने वाला हर पर्यटक कुछ नया अनुभव लेकर लौटता है.
