चंडीगढ़ | हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. इन्हें अब लोन लेने के लिए बैंकों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. सूबे की नायब सैनी सरकार ने साढ़े 9 साल पुराने आदेश में बदलाव करते हुए फिर से पुराना सिस्टम लागू कर दिया है. अब सरकारी कर्मचारियों को लोन दिलाने की जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर होगी.

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरूण गुप्ता ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं जिसमें 4 नवंबर 2016 को जारी आदेशों को वापस लिया गया हैं जिसके तहत मकान, वाहन, कम्प्यूटर और शादी लोन के संबंध में ऋण पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक में स्थानांतरित कर दिया गया था.
हरियाणा सरकार देगी सीधा लोन
अब प्रदेश सरकार की पूर्व की नीति और समय- समय पर जारी निर्देशों के अनुसार ऋण प्रदान किए जाएंगे. इस डायरेक्ट लोन व्यवस्था को फिर से लागू करने से कर्मचारियों को फायदा पहुंचेगा. प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों को मेजर हेड- 7610 के अंतर्गत वार्षिक बजट प्रविधान के माध्यम से सीधे ऋण या अग्रिम राशि प्रदान करेगी.
हरियाणा ट्रेजरी नियम के अंतर्गत निर्धारित लास्ट पे सर्टिफिकेट के प्रारूप में भी बदलाव किया जाएगा. सरकारी कर्मचारियों से संबंधित वित्तीय अभिलेखों की प्रणाली को आधुनिक एवं अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है. इसका उपयोग विशेष रूप से किसी सरकारी कर्मचारी का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरण के समय होता है.
पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा
नए प्रारूप में विशेष रूप से यूनिक कोड पेयी तथा स्थायी सेवानिवृत्ति खाता नंबर को शामिल करने का प्रविधान किया गया है, जो हाल के वर्षों में कर्मचारी के वित्तीय अभिलेखों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. इसके अतिरिक्त, सेवा की पूरी अवधि के सत्यापन से संबंधित एक नया कालम भी जोड़ा गया है जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा.
संशोधित प्रारूप में कर्मचारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल करने का भी प्रविधान किया गया है. कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे- लेवल, बेसिक- पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा. इसके साथ ही इनकम टैक्स, जीपीएफ, सब्सक्रिप्शन, एडवांस और रिकवरी सहित पूरी कटौती लेने का भी प्रविधान शामिल किया गया है.