महेंद्रगढ़ | हरियाणा में सरसों कटाई के बाद अब फसल गेहूं कटाई कार्य जोरों पर है. इसके बाद खरीफ सीजन की फसलों बाजरा, कपास आदि की बिजाई शुरू हो जाएगी. दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र की बात करें तो यहां बाजरे की खेती के साथ-साथ अब किसानों का रूझान कपास की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है.

आज से लगभग दो दशक पहले की बात करें तो यहां लगभग 2 हजार हेक्टेयर भूमि पर कपास की बिजाई की जाती थी. उत्पादन 786 मीट्रिक टन था तो वहीं अब यह रकबा बढ़कर साढ़े 23 हजार हेक्टेयर से ज्यादा और उत्पादन बढ़कर साढ़े 9 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा पहुंच चुका है.
रकबा और उत्पादन दोनों में दिखी बढ़ोतरी
पिछले साल महेंद्रगढ़ में कपास का रकबा बढ़ने के साथ उत्पादन भी बेहतर रहा, जिससे जिला प्रदेश के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों की सूची में शामिल हो गया था. महेंद्रगढ़ जिले में पिछले 25 सालों में कपास की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.
हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, रोहतक व महेंद्रगढ़ अब कपास उत्पादन के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं. ग्वार जैसी फसलों के रकबे में गिरावट आई है. साल 2024-b25 में जिले में 17 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र पर कपास की बिजाई की गई थी लेकिन लगातार बारिश के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ा था. कृषि अधिकारी डॉ. अजय यादव ने बताया कि महेंद्रगढ़ के किसान जागरूक हैं और पिछले दो दशकों में कपास के रकबे व उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
कपास के लिए अनुकूल परिस्थितियां
उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियां कपास उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती हैं. डार्क जोन में शामिल इस क्षेत्र में नहरी पानी की उपलब्धता सीमित है. ऐसे में कम सिंचाई में तैयार होने वाली कपास किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है. अन्य क्षेत्रों की तुलना में फसल में रोग भी कम लगते हैं, जिससे किसान कम कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं और गुणवत्ता बेहतर रहती है.