भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे शुभ दिन, सावन शिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलती; बनी रहेगी कृपा

ज्योतिष डेस्क | भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है. इस पूरे माह शिव भक्त व्रत, पूजा- अर्चना और जलाभिषेक कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. सावन के दौरान पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है. इसी दिन कांवड़ यात्रा का समापन भी होता है और शिव भक्त पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सावन शिवरात्रि मनाई जाती है.

Mahashivratri Shiv Mahadev

इस दिन देशभर से कांवड़ यात्रा कर लौटे श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और जलाभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है.

सावन शिवरात्रि 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 10 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और 11 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर 10 अगस्त 2026, सोमवार को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी. इसी दिन कांवड़ यात्रा का समापन होगा और श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे.

देखें समय

मुहूर्त / पूजा समय समय
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा दोपहर 06:57 बजे से 09:44 बजे तक
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा रात 09:44 बजे से 12:31 बजे तक
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा रात 12:31 बजे से 03:18 बजे तक
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा रात 03:18 बजे से 06:05 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:36 बजे से 05:20 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:50 बजे से 12:56 बजे तक
विजय मुहूर्त दोपहर 02:39 बजे से 03:41 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 06:57 बजे से 07:19 बजे तक
अमृत काल सुबह 09:33 बजे से 11:03 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग रात 11:39 बजे से सुबह 06:05 बजे तक
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धार्मिक महत्व

सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है. कांवड़ यात्रा से लाया गया पवित्र जल भी इसी अवसर पर भगवान शिव को समर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा और भक्ति के साथ जलाभिषेक करने से महादेव प्रसन्न होते हैं. ऐसा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, नकारात्मकता समाप्त होती है और परिवार में सुख-शांति तथा समृद्धि का वास होता है. मान्यता यह भी है कि भगवान शिव की कृपा से साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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Sanjukta Pandit
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