नई दिल्ली | तेलुगु राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मानसून के दो महीने गुजरने के बावजूद कई इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है. पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेतों में खड़ी फसलों पर संकट मंडरा रहा है. ऐसे में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के एक गांव में बारिश के लिए अपनाई गई सदियों पुरानी मान्यता चर्चा का विषय बन गई है. विदपनकल्लू मंडल के पलथुर गांव में ग्रामीणों ने अच्छी बारिश की कामना से दो गधों का विवाह कराया. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परंपरा के जरिए वर्षा के देवता भगवान वरुण को प्रसन्न किया जा सकता है और इलाके में बारिश होती है.
गधों की शादी के लिए गांव के शंकरेश्वर स्वामी मंदिर परिसर को सजाया गया था. दोनों गधों को फूलों की मालाओं से सजाने के साथ हल्दी और केसर के पानी का छिड़काव किया गया. इसके बाद बिल्कुल पारंपरिक विवाह की तरह शादी की रस्में निभाई गईं.
मंदिर परिसर में हुई शादी
ग्रामीणों ने गधों को चावल अर्पित किए, मालाएं पहनाईं और मंगलसूत्र/रस्सी बांधकर विवाह की रस्म पूरी की. इसके बाद दोनों को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाकर ढोल-नगाड़ों के साथ पूरे गांव में जुलूस निकाला गया. इस दौरान कई ग्रामीणों ने गधों के सामने झुककर आशीर्वाद भी लिया. गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके में जब भी लंबे समय तक सूखा पड़ता है या अकाल जैसी स्थिति बनती है, तब गधों का विवाह कराने की परंपरा निभाई जाती है. ग्रामीणों की मान्यता है कि गधों की पूजा और सेवा करने से भगवान वरुण प्रसन्न होते हैं और बारिश का रास्ता खुलता है.
वायरल हुआ वीडियो
पलथुर गांव में हुए इस अनोखे विवाह के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं. लोग इस परंपरा को लेकर हैरानी जता रहे हैं जबकि गांव के किसान अब आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं. उनका इंतजार है कि इस अनोखी रस्म के बाद जल्द ही बारिश हो और सूख रही फसलों को राहत मिल सके. विवाह की रस्में पूरी होने के बाद गांव में सामूहिक प्रीतिभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए.
