ज्योतिष डेस्क । उत्तराखंड का बागेश्वर अपनी पहाड़ियों, नदियों और धार्मिक स्थलों के लिए खास पहचान रखता है. यहां कई ऐसे मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जिनसे सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इन्हीं में एक भगवान ब्रह्मा जी का मंदिर भी है, जो अपनी धार्मिक मान्यता के साथ- साथ प्राकृतिक वातावरण के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है. यह मंदिर सरयू और गोमती नदियों के संगम के आसपास स्थित है.
मंदिर के आसपास के इलाके को स्वर्ग वाटिका के नाम से भी जाना जाता है. संगम, पहाड़ों और शांत वातावरण के बीच मौजूद यह स्थान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ प्रकृति के करीब आने का मौका भी देता है.
सृष्टि के रचयिता
बागेश्वर के वरिष्ठ शिक्षक हरीश दफौटी के अनुसार, हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना गया है. मान्यता है कि संसार की रचना ब्रह्मा जी ने की थी. इसके बावजूद, देशभर में भगवान ब्रह्मा को समर्पित मंदिरों की संख्या काफी कम है. ब्रह्मा जी की पूजा अन्य प्रमुख देवताओं की तुलना में कम होने को लेकर पुराणों और लोक परंपराओं में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं. इन्हीं में एक प्रसिद्ध कथा राजस्थान के पुष्कर से जुड़ी है.
नाराज हुईं सावित्री
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में यज्ञ का आयोजन किया था. यज्ञ के शुभ मुहूर्त में उनकी पत्नी सावित्री का मौजूद रहना जरूरी था, लेकिन उनके समय पर नहीं पहुंचने के कारण मुहूर्त निकलने की स्थिति बन गई. यज्ञ को निर्धारित समय पर पूरा करने के लिए ब्रह्मा जी ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया. जब सावित्री को इस बात की जानकारी हुई तो वह नाराज हो गईं. लोक मान्यता के अनुसार, उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पृथ्वी पर उनकी व्यापक रूप से पूजा नहीं होगी. इसी कथा के कारण राजस्थान का पुष्कर भगवान ब्रह्मा की पूजा के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है.
दूसरी कथा भी प्रचलित
भगवान ब्रह्मा की पूजा सीमित होने के पीछे एक अन्य पौराणिक कथा भी सुनाई जाती है. इसके अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था. इसी दौरान ब्रह्मा जी के असत्य बोलने से भगवान शिव नाराज हो गए. कथा में कहा जाता है कि शिव जी ने ब्रह्मा को पृथ्वी पर व्यापक पूजा न मिलने का श्राप दिया. हालांकि, इन कथाओं के अलग- अलग धार्मिक और लोक संस्करण मिलते हैं इसलिए इन्हें पौराणिक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाता है.
अलग- अलग भूमिका
हिंदू धार्मिक परंपरा में ब्रह्मा, विष्णु और महेश को त्रिदेव कहा जाता है. ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता, भगवान विष्णु को पालनकर्ता और भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है. बागेश्वर का ब्रह्मा मंदिर इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है. यहां श्रद्धालुओं को मंदिर के दर्शन के साथ सरयू- गोमती संगम और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता देखने का अवसर भी मिलता है.
प्रकृति का संगम
बागेश्वर का यह क्षेत्र धार्मिक महत्व के साथ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है. नदियों का संगम, पहाड़ी वातावरण और शांत परिवेश इसे खास बनाते हैं. यहां सिर्फ धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ही नहीं बल्कि प्रकृति को करीब से महसूस करने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं. ब्रह्मा मंदिर और स्वर्ग वाटिका का यह क्षेत्र बागेश्वर की धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को एक साथ सामने लाता है.
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