ज्योतिष डेस्क | भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन देशभर के मंदिरों में विशेष सजावट के साथ पूजा- अर्चना होती है. भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है और मध्यरात्रि में उनके जन्म के समय आरती व भजन- कीर्तन किए जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा. ज्योतिष पंडित कल्कि राम के मुताबिक, इस बार जन्माष्टमी पर खास नक्षत्रीय संयोग बन रहा है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में चंद्रमा की स्थिति थी. इस बार भी ऐसी ही स्थिति बनने की बात कही जा रही है. सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह समय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और आराधना के लिए विशेष माना जा सकता है.
करें पूजा की तैयारी
पंडित कल्कि राम के अनुसार जन्माष्टमी की शाम सूर्यास्त के समय पूजा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण का चित्र या लड्डू गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद पीले रंग का वस्त्र बिछाकर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें. पूजा के दौरान भक्त ‘हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे’ महामंत्र का जाप कर सकते हैं. इसके अलावा ‘क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जाप भी किया जा सकता है.
रात 12 बजे करें विशेष पूजा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए रात 12 बजे पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस समय घी का दीपक जलाकर भगवान कृष्ण को डंठल लगा हुआ खीरा, माखन-मिश्री और बांसुरी अर्पित करें. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख- समृद्धि आती है. हालांकि, बताए गए उपायों को धार्मिक मान्यता के तौर पर ही देखना चाहिए.
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