सोनीपत । उत्तर भारत में गर्मी ने आमजन को परेशान कर दिया है. हाल ही के दिनों में मानसून ने दी दस्तक दी, जिसको लेकर कृषि विभाग की तरफ से कपास उत्पादकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है. इसमें किसानों को जड़ गलन रोग के प्रति सचेत रहने और सफेद मक्खी की सप्ताहिक निगरानी करने की बात कही गई है. इसके अलावा किसानों को कपास की सिंचाई को लेकर भी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. ताकि उन्हें फसल में किसी प्रकार का नुकसान ना हो.
कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए जारी की गई एडवाइजरी
सोनीपत में मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत बड़ी संख्या में किसानों ने इस बार धान की बजाय कपास की फसल उगाई है. मॉनसून सीजन में कपास की फसल में कई प्रकार की बीमारियां फैलने का खतरा रहता है. इससे उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. ऐसे में कृषि विभाग ने कपास उत्पादक किसानों को गाइडलाइन जारी करके संभावित रोगों से निपटने के लिए तैयार रहने की बात कही है. बता दें कि कृषि विभाग धान की खेती को छोड़कर कपास या अन्य फसल उगाने पर मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत प्रति एकड़ ₹7000 की आर्थिक सहायता प्रदान करती है.
ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों ने जल संरक्षण की मुहिम को मजबूत करते हुए जिले में धान की खेती छोड़कर कपास की खेती शुरू की है. जिले में करीब 6000 हेक्टेयर भूमि में कपास उगाई गई है. बता दे कि मॉनसून सीजन में जड़ गलन रोग,पत्ती मरोड़ रोग,सफेद मक्खी, हरा तेला का प्रकोप बढ़ने की संभावना अधिक रहती है. कृषि विभाग द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में किसानों को कहा गया है कि बीमारी से सूखे हुए पौधों को उखाड़ दे ताकि बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सके. इसके अलावा किसानों को कपास के साथ भिंडी की खेती न करने की सलाह दी है. किसानों ने जल संरक्षण की मुहिम में सहयोग देना शुरू कर दिया है. जून महीने में कपास की खेती में होने वाली गतिविधियों व प्रबंध के प्रति जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है.
