कैथल । कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक करने की पूरी साजिश को एक हफ्ते की तैयारी के साथ अंजाम दिया गया. बता दें कि 31 जुलाई को पेपर सेट होने से लेकर 6 अगस्त को इसके कैथल पहुंचने तक के पूरे सफर में रोजाना कई बैठकें हुई. इसमें दोनों दिन 7 अगस्त और 8 अगस्त के पेपर लीक का सौदा हुआ था. 7 अगस्त के पेपर की आंसर की सही निकालने पर 8 अगस्त के पेपर का भी सौदा हो चुका था.
7 दिन की प्लानिंग के तहत किया गया पेपर लीक
वहीं इस दौरान मुख्य आरोपित प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी जितेंद्र कुमार हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के कार्यालय चंडीगढ़ भी एजेंसी की तरफ से आया. बता दें कि इससे पहले भी वह पेपर लीक कर उसकी हार्ड कॉपी निकाल चुका था. जब वह चंडीगढ़ पहुंचा तो उसके पास एजाज अमीन का फोन आया. तब जितेंद्र ने उसे बताया था कि उसने पेपर की हार्ड कॉपी अपने घर पर रखी हुई है. एजाज ने उसके घर से पेपर लेकर अफजल को जम्मू एयरपोर्ट पर दिया था.
वही 5 अगस्त को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिसार के खांडा खेड़ी निवासी राजकुमार से अफजल आंसर की लेकर अपने दो साथियों वेद प्रकाश और राजकुमार को साथ लिया. वह तीनों गुरुग्राम पहुंचे और यहां आंसर की 5 फोटो कॉपी करवाई. एक सेट उन्होंने रोहतक के रिटोली गांव निवासी वेद प्रकाश को दिया, वही दूसरा रेवाड़ी के राजकुमार को और बाकी अपने पास रख लिए.
अफजल उन्हें आंसर की देकर एक रात दिल्ली के पहाड़गंज में किसी होटल में रुका. बता दें कि राजकुमार फरीदाबाद के किसी होटल में काम करता था, जिसकी वजह से 2 अगस्त को सभी की मीटिंग फरीदाबाद के रॉयल हांडी होटल में हुई. पेपर लीक की खबरें पुख्ता है या नहीं इसकी पुष्टि करने के लिए भी तीन चार अगस्त को हिसार की लघु सचिवालय कॉलोनी निवासी नरेंद्र, ढाणी खुशहाल निवासी निहाल और गांव माजरा प्यो निवासी नवीन तीनों जम्मू पहुंचे थे. वहां उन्होंने अपनी आंखों से आंसर की देखी. तब जाकर उन्हें कंफर्म हुआ और उसके बाद वे हिसार लौटे. वही हिसार निवासी नरेंद्र ने अपने दो करीबियों से सीआईएसएफ में नौकरी लगवाने के लिए 10-10 लाख रुपए लिए थे, लेकिन वह उन्हें लगवा नहीं पाया था. इसलिए उसने अब उन्हें पुलिस में भर्ती कराने का वादा किया था.
