हरियाणा के मुख्य सचिव की बैठक, कृषि से जुडी करोड़ों रुपए की परियोजनाओं को दी मंजूरी

चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति की बैठक हुई. बैठक में 159 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. बैठक में अपर मुख्य सचिव (एसीएस) आपदा प्रबंधन पी.के. दास, ए.सी.एस. वित्त टीवीएसएन प्रसाद, ए.सी.एस. कृषि एवं किसान कल्याण सुमिता मिश्रा एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. एसीएस सिंचाई देवेंद्र सिंह, आयुक्त एवं सचिव पशुपालन विभाग पंकज अग्रवाल, एमडी. डेयरी विकास विभाग ए. श्रीनिवास समेत कई कृषि विशेषज्ञ ऑनलाइन शामिल हुए.

Kisan Fasal

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के किसानों के जोखिम को कम करने और कृषि व्यवसाय और उद्यमिता को बढ़ावा देकर कृषि को लाभदायक आर्थिक गतिविधि बनाने के लिए प्रभावी योजनाएं लागू की जा रही हैं. राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति की बैठक में अनुमति दे दी गई है. इन योजनाओं के क्रियान्वयन से कृषि की उच्च तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी.

फसल विविधीकरण के लिए 38.50 करोड़ स्वीकृत

मुख्य सचिव ने एक लाख रुपये प्रोत्साहन राशि को मंजूरी दी. राज्य में मक्का उगाने वाले किसानों को 2400 रुपये प्रति एकड़ दलहन फसलों के लिए 3600 प्रति एकड़. इससे राज्य में तिलहन और दलहन फसलों को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा फसल विविधीकरण के लिए 38.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. प्रदेश के 10 जिलों में देंचा, मक्का और दलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए 50,000 एकड़ भूमि में फसल विविधीकरण योजनाएं लागू की जाएंगी.

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उन्होंने कहा कि फसल चक्र बदलने से भूजल के गंभीर दोहन को रोकने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में भी मदद मिलेगी. किसानों को जलजमाव की समस्या से निजात दिलाने के लिए पोर्टल बनाया गया है. किसान अपनी कृषि भूमि को पोर्टल पर अपलोड कर स्वेच्छा से जल निकासी करवा सकते हैं. इस वर्ष झज्जर, रोहतक, सोनीपत के 20 हजार एकड़ किसानों की जलजमाव की समस्या से निजात दिलाने का लक्ष्य रखा गया है.

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25 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए

उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मृदा परीक्षण किया जा रहा है और किसानों को भूमि की गुणवत्ता के अनुसार उर्वरक, बीज आदि का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसके लिए 100 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं. इनके जरिए अब तक 25 लाख सैंपल लिए जा चुके हैं.

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