121 किलो के पारद शिवलिंग के लिए मशहूर हैं हरियाणा का ये मंदिर, 315 साल पुराना है इतिहास

भिवानी । हरियाणा की पावन धरा भिवानी का नाम छोटी काशी यूं ही नहीं पड़ा है. यहां धार्मिक ज्ञान की गंगा बहती है. इस छोटे शहर में आपको बहुत सारे मंदिर देखने को मिलेंगे और इनमें से कई मंदिर ऐसे हैं जिनका इतिहास बेमिसाल है. ऐसा ही एक मंदिर है बाबा जहरगिरी मंदिर जो लोहारू रोड़ रेलवे ओवरब्रिज के समीप स्थित है.

shiv mandir

इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर भगवान शिव का 121 किलो का पारद (पारा धातु) से बना शिवलिंग है. पारद शिवलिंग आपको इस मंदिर के अलावा सिर्फ करोलबाग का हनुमान मंदिर, हरिद्वार के जूना अखाड़ा और अहमदाबाद के शिव मंदिर में देखने को मिल सकता है.

पौष मास की नवमी को भंडारा

315 साल का इतिहास समेटे इस मंदिर में हर साल जनवरी यानि पौष मास की नवमी को बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन किया जाता है. इस दिन देशभर से हजारों की संख्या में साधु-संतों की भीड़ यहां पर जुटती है. इस भंडारे में प्रसाद गंगाजल से तैयार किया जाता है. जिसे आसपास से हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु ग्रहण करते हैं.

मंदिर में लगाई गई है चारपाई

मंदिर परिसर करीब दो एकड़ में फैला हुआ है. मंदिर में बाबा जहरगिरी की चारपाई लगाई गई है. लोगों की मान्यता है कि बाबा यहां रात को सोते है. जब सुबह उठकर देखते हैं तो चारपाई पर बिस्तर में पड़ी सलवटें यकीन दिलाती है कि बाबा यहां आकर सोते हैं.

इस चारपाई की श्रद्धालु पूजा करते हैं. मंदिर में बाबा जहरगिरी की संगमरमर की मूर्ति स्थापित की गई है. यहां पर 588 किलो का एक घंटा लगा है जो आकर्षण का केंद्र बना है. इसके अलावा 151 किलो के तीन घंटे हैं और 51 किलो वजन के 12 घंटे लगाए गए हैं.

जल संरक्षण की मिसाल है मंदिर

बाबा जहरगिरी मंदिर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है. यहां पर बरसाती पानी का संग्रहण किया जाता है. मंदिर में जितना पानी इस्तेमाल किया जाता है उसको सीधा जमीन में छोड़ा जाता है. भगवान शिव पर जलाभिषेक के रूप में चढने वाला जल और दूध भी जमीन में छोडने के लिए पाइप लाइन दबाई गई हैं.

बाबा जहरगिरी को पंजाब से लेकर आए थे

मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे श्रीमहंत जूना अखाड़ा अशोक गिरी ने बताया कि उन्होंने महात्माओं से पता चला है कि भिवानी के सेठ खूबाराम अग्रवाल की मन्नत पूरी होने पर वह बाबा जहरगिरी को पंजाब के संगरूर से लेकर आए थे. 315 वर्ष पहले बाबा जहरगिरी ने यहां पर आकर मंदिर की स्थापना की.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.