CBSE 2026 से बदलेगा परीक्षा का तरीका, अब कांसेप्ट क्लियर होने पर मिलेंगे नंबर

नई दिल्ली, CBSE | अगर आप भी डेली पढ़ाई नहीं करते और सोचते हैं कि कुछ दिन किताबें रटकर टॉपर बन जाएंगे तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन यानी सीबीएसई साल 2026 से पढ़ाई और परीक्षा का पूरा तरीका बदलने जा रहा है. अब वो समय जा चुका, जब रट्टा मारकर पन्ने भरने से अच्छे नंबर आ जाते थे. नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में ऐसा नहीं होगा के सीधा किताबों से सवाल पूछे जाएं बल्कि आपके दिमाग की समझ से पूछे जाएंगे. इसका सीधा सा मतलब यह है कि अब वह बच्चे टॉप करेंगे जिनके कांसेप्ट क्लियर है.

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यह चेंज इसलिए किया जा रहा है ताकि स्टूडेंट्स का स्ट्रेस कम हो. सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में किताबों की थ्योरी के अपेक्षा ऐसी समस्याएं पूछी जाएंगी, जो हमारी वास्तत्विक जिंदगी से संबंधित होती हैं. यही नहीं, 10वीं के छात्रों को अब वर्ष में 2 बार बोर्ड परीक्षा देने का मौका मिलेगा. अगर पहली बार में तैयारी कम रह जाए तो दूसरी बार में सुधार सकते हैं.

 50 फीसदी सवाल होंगे कॉम्पिटेंसी बेस्ड

बोर्ड द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है कि 2026 से प्रश्नपत्रों में रटे-रटाए जवाबों की जगह नहीं होगी. अब 50% सवाल ‘कॉम्पिटेंसी बेस्ड’ (Competency- Focused) रहेंगे. इनमें केस स्टडी, सोर्स बेस्ड इंटीग्रेटेड प्रश्न और वास्तविक जीवन की स्थितियों पर आधारित समस्याएं सम्मिलित होंगी. इसका अर्थ है कि यदि आपने चैप्टर को गहराई से नहीं समझा है तो आप उत्तर नहीं दे पाएंगे.

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शिक्षकों और स्कूलों को भी अपना पढ़ाने का तरीका बदलना होगा. क्लास में सिर्फ सिलेबस पूरा करना काफी नहीं होगा बल्कि छात्रों को ‘एनालिटिकल थिंकिंग’ (विश्लेषणात्मक सोच) के लिए भी रेडी करना होगा. सीबीएसई बोर्ड परीक्षाके जरिये अब यह जांचेगी कि छात्र ने जो पढ़ा है, उसे वह असल दुनिया में कैसे लागू कर सकता है.

साल में मिलेगा 2 बार पेपर देने का मौका

सीबीएसई द्वारा यह ऐलान किया गया है कि कक्षा 10वीं के छात्रों को साल में दो बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा. पहली परीक्षा फरवरी- मार्च में आयोजित होंगी वहीं दूसरी परीक्षा का आयोजन मई-जून में किया जाएगा. स्टूडेंट्स अपनी पसंद और तैयारी के अनुसार परीक्षा दे पाएंगे और दोनों में से जो ‘बेस्ट स्कोर’ होगा, उसे फाइनल स्कोर माना जाएगा. यह फैसला परीक्षा के ‘करो या मरो’ वाले डर को समाप्त करने के लिए किया गया है. इससे स्टूडेंट को अपने अंकों में सुधार करने का एक और मौका मिलेगा.

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Deepika Bhardwaj
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मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. पिछले साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar वेबसाइट पर राइटर का काम कर रही हूँ. मैं यहाँ हरियाणा व दिल्ली में निकली सरकारी और प्राइवेट नौकरी से जुड़ी जानकारी साझा कर रही हूँ.