चंडीगढ़ | 25 सितंबर को हरियाणा के रोहतक जिले की अनाज मंडी में इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी (INLD) पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व चौधरी देवीलाल की जयंती पर सम्मान दिवस समारोह का आयोजन करने जा रही है. इस रैली के मंच से इनेलो प्रमुख चौधरी अभय सिंह चौटाला ने ‘राइट टू रिकॉल’ की मांग करने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद सभी राजनीतिक दलों के जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों में खलबली मच गई है.
क्या है राइट टू रिकॉल?
ऐसे जनप्रतिनिधियों को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से हटाने का प्रविधान है, जो जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरते अथवा उनके किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाते हैं. पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व चौधरी देवीलाल ने अपने शासनकाल के दौरान यह आवाज उठाई थी कि जो भी सांसद या विधायक जनता से किए गए वादों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसके लिए संविधान में संशोधन कर ‘राइट टू रिकॉल’ लागू होना चाहिए.
अपने दादा की इस मांग को पूरा करने का अब इनेलो प्रमुख चौधरी अभय सिंह चौटाला ने बीड़ा उठाया है. इसके लिए उन्होंने ताऊ देवीलाल जयंती समारोह के मंच को चुना है. स्वर्गीय चौधरी देवीलाल हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और हरियाणा प्रदेश के गठन में उनकी निर्णायक भूमिका रही है.
इन देशों में लागू हैं यह व्यवस्था
साल 1995 से ब्रिटश कोलंबिया और कनाडा जैसे देशों ने अपने वोटर्स को ऐसा अधिकार दे रखा है. अमेरिका के जॉर्जिया, अलास्का और कैन्सास राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था है. वाशिंगटन और रोड द्वीपों में ऐसी प्रक्रिया का संचालन किसी प्रतिनिधि के बुरे आचरण या अपराध में संलिप्त होने पर किया जाता है.
झूठे वादों से करेंगे परहेज
अभय चौटाला ने कहा कि राइट टू रिकॉल लागू होने से जनता किसी भी ऐसे प्रतिनिधि को, जो पहले 1 साल में कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, उसे उसके पद से हटा सकती है. अपने लिए दूसरा प्रतिनिधि चुन सकती है. इस व्यवस्था से जनप्रतिनिधि झूठे वादों से परहेज करेंगे और पद गंवाने के डर से समर्पित भाव से जनता की भलाई के लिए काम करेंगे.
