चंडीगढ़ | हरियाणा में जमीन इंतकाल के लंबित पड़े मामलों को निपटाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा राज्यव्यापी अभियान ‘जलसा- ए- आम’ को हरी झंडी दिखाई गई है जिसके तहत भूमि म्यूटेशन (रजिस्ट्री के बाद भूमि रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना यानी इंतकाल) से जुड़े हजारों लंबित मामलों को निपटाने में तेजी लाई जाएगी.
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस महीने प्रत्येक शनिवार यानि 10, 17, 24 और 31 जनवरी को जन- सम्मलेन का आयोजन किया जाएगा ताकि म्यूटेशन मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकें.
हरियाणा के इन जिलों पर रहेगा फोकस
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों के साथ हुई बैठक में डॉ सुमिता मिश्रा ने कहा कि फिलहाल प्रदेश में म्यूटेशन के 1 लाख, 89 हजार, 635 आवेदन पेंडिंग हैं. उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि दस दिन से ज्यादा समय से लंबित 50,974 मामलों का प्राथमिकता से निपटान किया जाए. इनमें अंबाला, फरीदाबाद और पलवल पर विशेष फोकस रहेगा.
उन्होंने बताया कि ऑटो म्यूटेशन की दिशा में हरियाणा प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके लिए प्रत्येक सहायक कलेक्टर को हर महीने न्यूनतम 12 भूमि विभाजन मामलों और कम कार्यभार वाले तहसीलदारों को हर महीने 20 मामलों को निपटाने का टारगेट दिया गया है. जिला, मंडल और राज्य स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी.
10 हजार रुपए मिलेगा मानदेय
वित आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र शुरू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत रिटायर्ड राजस्व अधिकारियों को अनुबंध आधार पर गांव- स्तरीय शिवरों में सहमति आधारित समाधान हेतु नियुक्त किया जाएगा. प्रत्येक सफलतापूर्वक निपटान मामले पर 10 हजार रुपए का मानदेय दिया जाएगा, जिसे विवादित पक्षकारों द्वारा समान रूप से आयोजित किया जाएगा. इसके साथ ही, उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों को ज्यादा संख्या में लंबित राजस्व मामलों वाले गांवों में शिविर आयोजित करने हेतु रिटायर्ड राजस्व अधिकारियों को पैनल में शामिल करने के निर्देश दिए.
