अब निजी स्कूल नहीं बेच सकेंगे पुस्तकें तथा वर्दियां, यहाँ करे शिकायत

चंडीगढ़ । प्रदेश के स्कूलों में इस बार नया सत्र कोरोना महामारी की वजह से एक अप्रैल की बजाय एक मई से शुरू होगा. हालांकि निजी स्कूलों ने नए सेशन के लिए तैयारियां अभी से शुरू कर दी है. स्कूलों में मिशन एडमिशन के तहत निजी स्कूल संचालकों द्वारा अक्सर अभिभावकों को स्कूलों में ही पुस्तकें तथा वर्दियां बेची जाती है. ऐसे में शिक्षा विभाग ने भी निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है.

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विभाग द्वारा निदेशक के आदेशों के तहत जिले में सभी छह खंड शिक्षा अधिकारियों की अध्यक्षता में टीमें गठित की गई है. यदि कोई अभिभावक निजी स्कूलों द्वारा स्कूल में ही पुस्तकें तथा वर्दियां बेचने की शिक़ायत करता है तो यह टीम जाकर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निदेशक के कार्यालय से सिफारिश करेगी. इसके साथ ही यदि कोई निजी स्कूल किताबें व वर्दी बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. इस कार्यवाही में स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है.

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बता दें कि मौलिक शिक्षा विभाग के निदेशक के एक पत्र के अनुसार अभी से मौलिक शिक्षा अधिकारियों को टीमों का गठन करने के आदेश दिए हैं. इन टीमों ने खंड शिक्षा अधिकारी को जांच करने का पूरा अधिकार दिया गया है.

बता दें कि हर साल स्कूलों में मिशन एडमिशन के दौरान अभिभावकों द्वारा निजी स्कूलों पर स्कूलों में ही पुस्तकें तथा वर्दियां बेचने का आरोप लगाया जाता है. यह मुद्दा प्रतिवर्ष अभिभावकों द्वारा उठाया जाता है. स्टूडेंट्स- पेरैंट्स एसोसिएशन के प्रधान मोनू बतरा ने बताया कि निजी स्कूलों की यह मनमानी बंद होनी चाहिए. यदि कोई स्कूल संचालक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ विभाग को उचित कार्रवाई कर उसकी मान्यता रद्द कर देनी चाहिए.

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