किसान आंदोलन: क्या दुष्यंत चौटाला खट्टर की बिना पतवार वाली नाव में उठा रहे हैं जोखिम

चंडीगढ़ । हरियाणा की राजनीति को गहराई से जानने वाले एक विशेषज्ञ का कहना है कि दुष्यंत चौटाला के पास खोने को बहुत कुछ है. वे किसान परिवार ही नहीं, अपितु देश की सियासत में प्रभावशाली रसूख रखने वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

किसान आंदोलन का हरियाणा की गठबंधन सरकार को जमकर विरोध झेलना पड़ रहा है. विधायकों व सांसदों के विरोध को लेकर हरियाणा में एक विचित्र स्थिति बन गई है. कुछ दिन पहले करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसान महापंचायत को संबोधित करने आ रहे थे, लेकिन किसानों के भयंकर विरोध के चलते वह रैली स्थल पर अपना हेलीकॉप्टर तक लैंड नहीं कर पाएं. गुरुवार को हिसार में भी उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को भी इसी तरह के हालातों का सामना करना पड़ा. जैसे ही लोगों को खबर मिली कि दुष्यंत चौटाला हिसार एयरपोर्ट आ रहे हैं, वहां पर भारी तादाद में किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा. नतीजतन दुष्यंत चौटाला को दूसरे रास्ते से बाहर निकालना पड़ा.

dushant chautala

हैरानी की बात यह है कि सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए 12 ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने पड़े. हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह लाडवा का कहना था कि, खट्टर की नाव तो बिना पतवार वाली है. पता नहीं,वह कहां से संचालित होती है. उन्हें तो डुबने की चिंता भी नहीं है. समझ में नहीं आ रहा दुष्यंत चौटाला, डूबने का जोखिम क्यों उठा रहे हैं. जब तक वो इस सरकार में सहयोगी दल के तौर पर रहेंगे,उनका विरोध होता रहेगा.

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प्रदेश के किसानों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि चुनाव जीतने के बाद दुष्यंत चौटाला बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे. अगर पहले किसानों को यह अंदेशा होता तो उन्हें प्रदेश में एक सीट भी नहीं मिलती. जहां पर दुष्यंत चौटाला की पार्टी को 10 सीटें नसीब हुई है , वहां पर किसानों ने दुष्यंत का खुलें दिल से समर्थन किया था. आज किसानों पर ज़ुल्म हों रहे हैं, मगर चौटाला के मुंह से उनके पक्ष में एक शब्द भी नहीं निकला है. किसान संगठन के नेताओं ने उनसे अपील की थी कि वे सत्ता छोड़कर किसानों का साथ दें,मगर वे सत्ता के लालच में डूबे बैठे हैं.

दुष्यंत चौटाला उस चौधरी देवीलाल परिवार के वंशज हैं जिन्होंने किसानों के हकों के लिए हमेशा लड़ाई लड़ी है. अगर अब भी उन्हें किसानों की स्थिति के बारे में मालूम नहीं है तो इसका मतलब साफ है कि उन्होंने सता भोगने के लिए भाजपा को समर्थन दिया था. इससे बड़ा अपमान ओर क्या होगा कि दुष्यंत चौटाला जैसे ज़मीन से जुड़े नेता को आज किसानों के विरोध के चलते अपने कार्यक्रमों में 12 ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने पड़े.

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कांग्रेस नेता व आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई ने दुष्यंत चौटाला पर निशाना साधते हुए अपने ट्वीट में लिखा,जिस हिसार ने देश का सबसे युवा सांसद बनाकर अपना प्यार बरसाया था, आज उसी हिसार में घुसने के लिए हजारों पुलिसकर्मियों का सहारा लेना पड़ रहा है. बिश्नोई ने लिखा,किसी भी राजनेता के लिए यह एक शर्मनाक व भयानक दृश्य है. जिन मतदाताओं ने इतनी उम्मीदों के साथ तुम्हें जनसेवा की शक्ति प्रदान की, आज वे तुम्हारा इतना विरोध कर रहे हैं. यह हरियाणा व हिसार का दुर्भाग्य है कि उन्हें एक ऐसा नेता मिला,जिसे सिर्फ कुर्सी से प्यार है, जनता से नहीं.

राजनैतिक विशेषज्ञ का कहना है कि दुष्यंत चौटाला के पास खोने को बहुत कुछ है.ये बात किसान भी मानते हैं कि सीएम खट्टर का कुछ नहीं बिगड़ने वाला. चुनाव में उन्होंने अपने बलबूते भाजपा को सत्ता नहीं दिलाई थी. सभी जानते हैं कि केन्द्र का हाथ उनके सिर पर है. साल 2024 के विधानसभा चुनावों में अगर हरियाणा में भाजपा की नैया डूबती है तो वह खट्टर के लिए ज्यादा नुकसानदेह नहीं होगा. चौटाला ने जब खट्टर का साथ दिया था,उस समय उनकी परिस्थितियां ज्यादा संघर्ष करने के पक्ष में नहीं थी. वजह, उनके दादा व पिता तिहाड़ जेल में थे. उन्होंने इनेलो से अलग होने के बाद मुश्किल से जजपा को खड़ा किया था. उनकी सोच यह थी कि वे सरकार में रह कर अपनी पार्टी को आगे ले जा सकते हैं. तब उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि कल को किसान आंदोलन जैसा कुछ घटनाक्रम भी हो सकता है.

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खैर अभी हरियाणा में दोनों सहयोगी दल किसान आंदोलन की ज्यादा परवाह इसलिए नहीं कर रहे, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों में लंबा समय बाकी है. यह बात अलग है कि आज प्रदेश में भाजपा और जजपा विधायकों का सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना दुभर हो गया है. अगर आने वाले दिनों में किसान आंदोलन स्पीड पकड़ता है तो प्रदेश में दुष्यंत चौटाला पर भी सता से बाहर आने का दबाव बढ़ेगा, इसमें कोई संदेह नहीं.

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