आधुनिक, टिकाऊ और मुनाफे वाली होगी हरियाणा में खेती; नए स्त्रोतों से बढ़ेगी किसानों की आमदनी

चंडीगढ़ | हरियाणा में किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. यहां खेती को परम्परागत ढांचे से निकालकर आधुनिक, टिकाऊ और मुनाफे वाली बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्यस्तरीय स्वीकृति समिति (SLSC) की मीटिंग में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM- RKVY) के तहत हरियाणा प्रदेश के लिए 1122 करोड़ रुपये की व्यापक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है.

Kisan Fasal

इस योजना को केवल बजट आवंटन तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि इसे खेती के संपूर्ण बदलाव के रूप में तैयार किया गया है जहां तकनीक, पानी की बचत, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़ा गया है. प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब खेती को श्रम आधारित नहीं बल्कि तकनीक आधारित बनाया जाएगा.

कृषि मशीनीकरण के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. किसानों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी. खास बात यह है कि छोटे और मध्यम किसानों को भी इन मशीनों तक पहुंच सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई है ताकि तकनीक का लाभ केवल बड़े किसानों तक सीमित न रहे.

पराली प्रबंधन पर विशेष फोकस

हर साल सर्दियों में हरियाणा प्रदेश की पहचान बन चुकी पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सख्ती की बजाय समाधान का रास्ता चुनते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 250 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं. इस बजट का इस्तेमाल मशीनों की खरीद, सब्सिडी और जागरूकता अभियानों पर किया जाएगा ताकि किसान खेत में ही अवशेष प्रबंधन कर सकें.

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धान- गेहूं के चक्र से बाहर निकलने के लिए सरकार ने फसल विविधीकरण पर खास जोर देते हुए एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 110 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इस पहल के तहत बागवानी क्षेत्र का विस्तार, पोस्ट- हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा. इसका सीधा फायदा किसानों को बेहतर दाम और कम जोखिम के रूप में मिलेगा.

पानी की कमी को देखते हुए ‘Per Drop More Crop’ योजना के तहत 160 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. इसका मकसद माइक्रो- इरिगेशन तकनीकों को बढ़ावा देना है जिससे कम पानी में ज्यादा उत्पादन संभव हो सके. यह कदम खास तौर पर उन इलाकों के लिए अहम है जहां भूजल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है. प्राकृतिक खेती के लिए अलग से 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.

नए स्त्रोतों से बढ़ेगी किसानों की आय

खाद्य सुरक्षा और आय बढ़ाने के लिए तिलहन और दलहन मिशनों के साथ- साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन को भी मजबूत किया जाएगा. इन योजनाओं का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना है. मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए 6 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है जिससे किसानों को एक्सट्रा आमदनी के अवसर प्राप्त होंगे.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.