चंडीगढ़ | हरियाणा की मंडियों में रबी सीजन की फसलों की सरकारी खरीद के बीच पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है जिसके बाद सरकार ने मंडियों में कच्ची पर्ची सिस्टम को बंद कर दिया है. इस संबंध में कृषि एवं विपणन बोर्ड की ओर से सभी मार्केट कमेटी सचिवों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
मंडियों में कच्ची पर्ची के माध्यम से फसल की खरीद के विरोध में कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर की तरफ से एक याचिका दायर की गई थी जिसमें उन्होंने मंडियों में कच्ची पर्ची सिस्टम पर रोक लगाने की मांग उठाई थी.
आंकड़ों में बड़े फर्क का दिया हवाला
डॉ. वीरेंद्र लाठर ने अपनी याचिका में कहा था कि प्रिंटेड रसीद पर दुकान का नाम, एड्रेस, नंबर और तारीख होनी चाहिए. ये रसीद फसल बेचने के तुरंत बाद किसान को मिलनी चाहिए, ताकि सब कुछ साफ- साफ पता चल सके. उन्होंने कहा था कि मंडियों में आढ़ती किसानों को कच्ची पर्ची देकर कम पैसे देते हैं लेकिन सरकारी कागजों में दिखाते हैं कि फसल MSP पर पूरे भाव में खरीदी गई है.
इससे जहां प्रदेश सरकार की साख को बट्टा लग रहा है तो वहीं दूसरी ओर किसानों को कम भाव मिल रहा है और आढ़ती मौज काट रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को जो भुगतान किया जाता है और जो सरकारी आंकड़े हैं उनमें बहुत बड़ा अंतर है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को किसानों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए, जो हमेशा एक्टिव रहें ताकि तुरंत प्रभाव से किसान अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह एक महीने के भीतर शिकायत पर स्पष्ट और ठोस आदेश जारी करे.
किसानों को देनी होगी पक्की रसीद
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बुधवार को हरियाणा सरकार ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सभी मार्केट कमेटियों के सचिवों को सख्त निर्देश जारी कर दिया है. जिसमें कहा गया है कि कोई भी आढ़ती किसान को कच्ची पर्ची जारी नहीं करेगा. इसके स्थान पर फसल खरीद के बाद अनिवार्य रूप से J फॉर्म ही किसान को दिया जाएगा, जिससे लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी.
