चंडीगढ़ | हरियाणा की जनता के लिए राहत भरी खबर है. बता दें कि सूबे की नायब सैनी सरकार ने 1 अगस्त से कलेक्टर रेटों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया था. सरकार ने अब अपने इस फैसले से यू- टर्न ले लिया है. प्रदेश सरकार ने 1 अगस्त से कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी के आदेश को वापस लिया है.
पिछले साल एक दिसंबर को नए कलेक्टर रेट लागू किए गए थे, जो इस साल 30 मार्च तक मान्य थे. पुराने कलेक्टर रेट पर ही रजिस्ट्रियां हो रही थी, जिसके चलते सरकार को राजस्व घाटा झेलना पड़ रहा था.
इतनी बढ़ोतरी की संभावना
नए कलेक्टर रेट के लिए विभिन्न स्थानों पर 5 से 25% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था. पिछले साल जमीन के कलेक्टर रेट में 12 से 32% तक बढ़ोतरी हुई थी. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नजदीकियों के चलते NCR में जमीन बहुत अधिक महंगी है, इसलिए वहां कलेक्टर रेट बाकी जिलों से काफी अधिक रखे गए थे.
इनमें रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, बहादुरगढ़, सोनीपत, करनाल और पानीपत में 20 प्रतिशत और गुरुग्राम, सोहना, फरीदाबाद, पटौदी और बल्लभगढ़ के कलेक्टर रेट में 30% तक बढ़ोतरी की गई थी. इस बार भी यहां रेट ज्यादा होने के आसार नजर आ रहे हैं.
क्या होता है कलेक्टर रेट?
किसी भी जिले में जमीन की वह न्यूनतम कीमत कलेक्टर रेट कहलाती है, जिसपर कोई रियल एस्टेट प्रोपर्टी खरीदार को बेची जा सकती है. इसी रेट पर तहसील में प्रोपर्टी की रजिस्ट्री होती है. कलेक्टर रेट में समय- समय पर बदलाव होता रहता है, जो जगह और मार्केट के रूझान पर डिपेंड करता है.
