चंडीगढ़ | हरियाणा में ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश लगाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. बजट सत्र में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में होने वाले सरकारी निर्माण कार्यों के चलते ठेकेदार या अधिकारी अब अपनी मर्जी से बजट संशोधित नही कर सकेंगे. अभी तक होता यह रहा है कि यदि कोई प्रोजेक्ट 8 करोड़ का बनता है तो उसका निर्माण कार्य चलते- चलते संशोधित बजट 12 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया जाता है.

हरियाणा में अलग से लगाना होगा टेंडर
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब इस प्रवृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. यदि किसी प्रोजेक्ट की लागत ज्यादा आती है तो उसकी बजट राशि में बढ़ोतरी नहीं होगी बल्कि बजट राशि में बढ़ोतरी की उचित वजह बताते हुए इसके लिए अलग से टेंडर लगाया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट के एस्टीमेट बढ़ाने का रिवाज सा हो गया है लेकिन अब यह चलने वाला नहीं है.
क्या था पूरा मामला?
पूंडरी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक सतपाल जांबा ने पाई गांव में कबड्डी अकेडमी के अधूरे पड़े भवन तथा बजट में बढ़ोतरी का मुद्दा बजट सत्र में उठाया था. उन्होंने बताया कि इसके लिए 2 करोड़ रुपए की बजट राशि पर्याप्त नहीं है और ठेकेदार इसमें बढ़ोतरी की बात कह रहा है.
उनके सवाल का जवाब देते हुए खेल मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि पाई गांव में कबड्डी अकेडमी की बिल्डिंग का निर्माण कार्य लगभग 90% पूरा हो चुका है. खेल विभाग द्वारा इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए PWD को 7.14 करोड़ रुपए की बजट राशि जारी की गई है. इस मुद्दे पर जब बजट राशि में बढ़ोतरी को लेकर चर्चा हुई तो सीएम ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अब सरकार ने फैसला लिया है कि किसी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के दौरान यदि उस परियोजना में कार्य का विस्तार किए जाने की आवश्यकता है तो उसके लिए नया टेंडर लगाया जाएगा. इससे एनहांसमेंट जैसी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित होगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में ऐसी स्थिति हैं कि किसी परियोजना पर काम जारी है तो बीच में ही एक्सपेंशन कर देते हैं जिससे बजट राशि में बढ़ोतरी और एनहांसमेंट जैसी समस्या आती है. अब इस खेल को रोकने का फैसला लिया गया है. यदि किसी तरह का एक्सपेंशन करना है तो उसके लिए अलग से टेंडर लगाना होगा. इस संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं.