हिसार | कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एक रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया था. हाल में ही इस रैपिड सपोर्ट टीम की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. हिसार के जहाज पुल स्थित सरकारी विद्यालय के एक लेक्चरार कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं लेकिन यह खबर उन तक काफी समय बाद पहुंचाई गई. लेक्चरर की उम्र 48 वर्ष है जो हिसार के सेक्टर 14 में रहते हैं.
जाने पूरा मामला विस्तार से
लेक्चरर ने दो बार कोविड-19 की जांच कराई थी. उन्होंने 21 सितंबर 2020 को RTPCR टेस्ट कराया था. साथ ही 22 सितंबर को रेपिड एंटीजन टेस्ट कराया था. इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई लेकिन अब कोविड पोर्टल पर उनकी रिपोर्ट को पॉजिटिव बताया जा रहा है. आरंभ में लेक्चरर को मौखिक रुप से रिपोर्ट के निगेटिव होने की बात कही गई थी. इसलिए लेक्चरर निश्चिंत होकर हमेशा की तरह अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गए. 23 सितंबर को RTPCR सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी लेकिन लेक्चरर तक यह खबर नहीं पहुंचाई गई. फिर कुछ दिनों बाद लेक्चरर ने स्वयं ही हेल्थ वर्कर को फोन किया और रिपोर्ट के बारे में पूछताछ की. तब उन्हें बताया गया कि यदि आप पॉजिटिव होंगे तो आपके पास फोन किया जाएगा अन्यथा आप स्वयं को नेगेटिव समझ ले, ऐसा ही हुआ. रैपिड रिस्पांस टीम ने कहा कि लेक्चरर का फोन नंबर गलत था इसलिए उनके केस को अनट्रेस लिस्ट में डाल दिया गया.
काफी लोगों के सम्पर्क में आये लेक्चरर
हेल्थ टीम ने स्कूल में जांच के दौरान भी लेक्चरर के बारे में जानने की कोशिश नहीं की. स्वयं के कोरोना पॉजिटिव होने से बेखबर लेक्चरर लगातार स्कूल में आते जाते रहे. वह अपने परिवार वालों, जानकारों, मित्रों आदि के संपर्क में आते रहे. 11 अक्टूबर को हेल्थ वर्कर ने सही नंबर मिलाया और लेक्चरर को उनके पॉजिटिव होने की खबर दी.
लेक्चरर हुए परेशान
स्वयं के कोरोना पॉजिटिव होने की बात सुनकर लेक्चरर दंग रह गए. उन्हें यह सब सोच कर परेशानी होने लगी कि मैं विद्यालय के करीब 70 से ज्यादा स्टाफ मेंबर, अपने परिजनों और काफी अनजान लोगों के संपर्क में आया हूँ. मेरी वजह से नाजाने कितने लोगों पर कोरोना संक्रमण का खतरा बना होगा.
लेक्चरर की रैपिड रिस्पांस टीम के खिलाफ शिकायत
अगर मेरा फोन नहीं लग रहा था तो बीओ ऑफिस, स्कूल या मेरे घर पर आकर भी मुझे यह खबर दे सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया जो कि एक बहुत बड़ी लापरवाही है.
