चंडीगढ़ | हरियाणा में योग का भविष्य सिर्फ एक कोच के भरोसे टिका हुआ है. योग का भविष्य अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है. डिपार्टमेंट में योग कोच के 66 पद स्वीकृत हैं जबकि नियम के अनुसार हर जिले में एक महिला और एक पुरुष कोच होना चाहिए, मगर ग्राउंड लेवल पर वास्तविकता बिल्कुल अलग है. आलम ये हैं कि राज्य के 22 जिलों में एक भी योगा कोच नहीं है. खिलाड़ी बिना गाइडेंस के अधर में लटके हैं.

हरियाणा में योग का भविष्य
सीएम नायब सिंह सैनी ने बीते वर्ष योग दिवस पर 40 पदों पर भर्ती करने की बात कही थी, पर वह फाइल आज भी किसी दफ्तर की फाइलों में दब कर रह गई है. कागजों पर योग का विकास भले ही काफी तेजी से दौड़ रहा हो, मगर वास्तव में यह सिर्फ वार्षिक इवेंट और और फोटो- ऑप तक सिमट चुका है. जब सिखाने वाले ही नहीं होंगे, तो खिलाड़ी कहां से सीखेंगे. ऐसे में क्या खिलाड़ी सिर्फ सरकारी विज्ञापनों की फोटो देखकर मेडल लाएंगे.
42 पदों की भर्ती की तैयारी
प्रशासन का यह रवैया योग को खेल नहीं, बल्कि एक आडंबर बना रहा है. हरियाणा के उप खेल निदेशक लक्ष्मी पंत का कहना है कि खेल विभाग द्वारा 66 योग कोच के पद मंजूर किए गए हैं. इनमें से 42 पदों की भर्ती के लिए तैयारी जारी है. उम्मीद दिख रही है कि आने वाले दिनों में ये पद भरें जाएंगे. बीते 33 सालों से विभाग द्वारा योगा कोच की भर्ती नहीं की गई है. इन वर्षों में 38 योग कोच रिटायर्ड हो गए है. दो बचे हैं, इनमें से एक खेल विभाग में डिप्टी निदेशक के पद पर नियुक्त हैं.
दूसरा हिसार में केवल एक योगा कोच बचा है, उनका भी प्रमोशन हो चुका है, मगर बच्चों के भविष्य के लिए वे आज भी मैदान में रुके हुए हैं. ये कोच योग की खेल नर्सरी में खिलाड़ियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में पदक दिलाने के लिए सुबह- शाम प्रेक्टिस करवा रहे हैं.